देश में असहिष्णुता की बढ़ती घटनाओं पर सरकार को तीन बार नसीहत दे चुके राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अब पुरस्कार लौटाने वाले लेखकों और बुद्धिजीवियों को नसीहत दी है।
पुरस्कार वापसी को गलत बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा है कि बुद्धिजीवियों को भावनाओं में बहने के बदले अपने मतभेद बहस और चर्चा के जरिये जाहिर करना चाहिए।
राष्ट्रपति ने बुद्धिजीवियों को सम्मान का कद्र करने की नसीहत देते हुए यह भी कहा कि हमें भारत की विचारधारा और संविधान में निहित मूल्यों और सिद्धांतों पर भरोसा रखना चाहिए।
नेशनल प्रेस डे पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने ऐसे समय में नसीहत दी है जब देश में असहिष्णुता के सवाल पर सरकार और विपक्ष आमने सामने है।
दूसरी ओर कई लेखकों, फिल्मकारों और बुद्धिजीवियों ने बढ़ती असहिष्णुता का हवाला देते हुए अपने पुरस्कार वापस लौटा दिए हैं। इससे पहले राष्ट्रपति ने एम कलबुर्गी, दाभोलकर और दादरी में गोमांस खाने की शक में मुस्लिम व्यक्ति की हत्या मामले में सरकार को नसीहत दी थी।