राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जन लोकपाल के सवाल पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि सभी कुछ संविधान के दायरे में होना चाहिए।
प्रणब दा ने कहा कि कानून चाहे केंद्र का हो या राज्य का, उसकी वैधता की परख संविधान में की गई व्याख्या के अनुसार न्यायपालिका कर सकती है।
संसद को लोकतंत्र की गंगोत्री बताते हुए उन्होंने आए दिन हंगामा करने वाले सांसदों को आत्मचिंतन करने की सलाह दी।
...तो गंगा भी प्रदूषण से नहीं बचेगी
राष्ट्रपति ने कहा कि यदि गंगोत्री ही प्रदूषित हो जाए तो गंगा और उसकी सहायक नदियां भी प्रदूषण से नहीं बचेंगी। इसलिए सभी सांसदों का दायित्व है कि वे लोकतंत्र और संसदीय कामकाज के उच्च मानदंडों को बनाए रखें।
केजरीवाल के जनलोकपाल का बगैर उल्लेख किए प्रणब ने कहा कि संसद का मुख्य कार्य सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समेत हर मोर्चे पर लोगों को सशक्त बनाने के लिए कानून बनाना, कार्यपालिका पर नियंत्रण रखना और उसे सभी तरह से जवाबदेह बनाना है।
उन्होंने कहा कि कानून की वैधता की परख करने का काम न्यायपालिका का है।
संसद चर्चा से चलती है, व्यवधान से नहीं
संसद के केंद्रीय कक्ष में सोमवार को सेंट्रल लेजिस्लेटिव एसेंबली के सभी प्रेसिडेंट तथा लोकसभा के सभी पूर्व अध्यक्षों के चित्रों का अनावरण करते हुए राष्ट्रपति ने संसद में हंगामे के चलते कामकाज के बाधित होने पर गंभीर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि संसद में चर्चा के जरिये कामकाज होता है और सभी पक्षों के लिए यह जरूरी है कि वे संसदीय परंपरा और नियमों का पालन करें। संसद चर्चा से चलती है व्यवधान से नहीं।
इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने स्पीकर की निष्पक्ष भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि बहुदलीय लोकतंत्र में इस पद की अहम भूमिका है।
स्पीकर किसी न किसी राजनीति पार्टी के सदस्य होते है, लेकिन स्पीकर चुने जाने के बाद उनसे राजनीतिक संबद्धता से दूरी बनाने तथा सदन के भीतर और बाहर पूरी तरह से निष्पक्ष बनने की उम्मीद की जाती है।