राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को हिमाचल सरकार की अव्यवस्था के चलते परेशानी का सामना करना पड़ा।
अव्यवस्था का आलम यह था कि राष्ट्रपति तो चंडीगढ़ से शिमला पहुंच गए, मगर न तो उनका सामान पहुंचा और न ही दवाएं ही पहुंचीं।
इस अव्यवस्था से नाराज राष्ट्रपति के डॉक्टर ए वली ने राज्य सरकार के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। तात्कालिक व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति को दी जाने वाली जरूरी दवाएं उन्हें पर्चा लिखकर मंगवानी पड़ीं।
उल्लेखनीय है कि राज्य विधानसभा को संबोधित करने के कार्यक्रम के तहत राष्ट्रपति चंडीगढ़ से हेलीकॉप्टर से शिमला पहुंचे।
यहां से हैलीपेड पर मुख्यमंत्री और राज्यपाल की अगवानी के बाद राष्ट्रपति अपने अमले के साथ प्रेसिडेंट रिट्रीट आए। इसके बाद से ही पूरा अमला खुद का और राष्ट्रपति का सामान पहुंचने की प्रतीक्षा करता रहा।
हेलीपैड से प्रेसिडेंट रिट्रीट की दूरी दो किमी से कम होने के बावजूद राष्ट्रपति तक सामान पहुंचने में करीब-करीब तीन घंटे लग गए।
चूंकि राष्ट्रपति के सामान के साथ जरूरी दवाएं भी थीं, इसलिए इस अव्यवस्था से डॉ वली बेहद नाराज हो गए। उन्होंने राष्ट्रपति के लिए बेहद जरूरी दवा के लिए पर्ची लिखी और इसे तत्काल लाने की सख्त हिदायत दी।
साथ ही राज्य सरकार के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर यह दवा जल्द नहीं पहुंची तो उनकी शिकायत पर सभी निलंबित हो जाएंगे।
दरअसल जिस गाड़ी से राष्ट्रपति का सामान और दवाएं आनी थीं, उस गाड़ी की एंट्री ही नहीं कराई गई थी। बताते हैं कि एंट्री न होने के कारण सुरक्षा कारणों से गाड़ी को रोक लिया गया था।