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वीरप्पन के चार साथियों को फांसी मिलना तय

Wed, 13 Feb 2013 10:37 PM IST
नई दिल्ली/चेन्नई/ब्यूरो/एजेंसी
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आतंकी अजमल कसाब और अफजल गुरू को फांसी के फंदे तक पहुंचाने के बाद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन के चार सहयोगियों की दया याचिकाएं भी खारिज कर दी है। इसके बाद इन चारों को अब कभी भी फांसी दी जा सकती है। ये चारों 1993 के एक बारूदी सुरंग धमाके के दोषी हैं। इस ब्लास्ट में 22 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।
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इस मामले में कर्नाटक के जंगलों में चंदन व हाथी दांत की तस्करी के लिए कुख्यात वीरप्पन गैंग ने बारूदी सुरंग धमाका किया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में वर्ष 2004 में ज्ञानप्रकाश, साइमन, मीसाई मदाइया और पिलावेंद्रन को फांसी की सजा सुनाई थी।

वीरप्पन को पुलिस पहले ही मार चुकी है। ये चारों दोषी फिलहाल बेलगाम जेल में बंद हैं। एक आरोपी के वकील बालमुरुगन ने बताया कि बेलगाम जेल प्रशासन की ओर से इन चारों की दया याचिका खारिज होने की सूचना उनके परिजनों को भिजवा दी गई है।
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मैसूर की टाडा अदालत ने चारों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और शीर्ष अदालत ने उन्हें मृत्युदंड दिया।

सात माह में खारिज की सात दया याचिकाएं
रायसीना हिल्स पहुंचने के बाद इन सात महीनों के भीतर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अब तक सात अपराधियों की दया याचिका नामंजूर कर चुके हैं। पिछले डेढ़ दशक में पहले राष्ट्रपति हैं जिन्होंने इतने अपराधियों की दया याचिका नामंजूर की है।

कसाब और अफजल की तरह उन्होंने एक अन्य अपराधी सैबाना निंगप्पा की दया याचिका भी खारिज कर दी थी। जबकि उनकी पूर्ववर्ती प्रतिभा पाटिल ने अपने कार्यकाल में 34 दया याचिकाएं मंजूर की थीं। इनमें चार को बलात्कार के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई थी।
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