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राष्ट्रपति ने दागियों को बचाने के अध्यादेश पर दागे सवाल

Fri, 27 Sep 2013 12:47 AM IST
एजेंसी/नई दिल्ली
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दागी सांसदों और विधायकों को बचाने के लिए लाए गए अध्यादेश पर अब राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी सवाल उठा दिए हैं।
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राष्ट्रपति ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार के तीन मंत्रियों को तलब कर पूछा कि आखिर दागियों को बचाने के लिए अध्यादेश की क्या जरूरत पड़ गई।

इस अध्यादेश को लेकर विपक्ष की ओर से हमला तेज होने और कांग्रेस में भी विरोध के स्वर उठने से यूपीए सरकार चौतरफा घिरती दिख रही है।

ऐसे में अध्यादेश पर मुहर लगाने के बजाय सवाल दाग कर दादा ने सरकार की मुश्किल और बढ़ा दी है। इससे माना जा रहा है कि यह अध्यादेश लटक भी सकता है।

कैबिनेट से मंगलवार को मंजूरी के बाद यह अध्यादेश राष्ट्रपति के पास भेजा गया था।

राष्ट्रपति ने बृहस्पतिवार रात पहले गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और कानून मंत्री कपिल सिब्बल को बुलाया, फिर बाद में संसदीय मामलों के मंत्री कमल नाथ को बुलाकर इस अध्यादेश पर बात की।

उन्होंने जानने की कोशिश की कि इस अध्यादेश को लाने के पीछे क्या तर्क है।

बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति अध्यादेश को अपनी मंजूरी देने को लेकर किसी तरह की जल्दबाजी में नहीं हैं। वह चाहते हैं कि सरकार इस अध्यादेश को लाने की जरूरत के बारे में बताए।
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माना जा रहा है कि राष्ट्रपति विशेषज्ञों से कानूनी सलाह भी ले सकते हैं कि अध्यादेश को मंजूरी दी जाए या नहीं।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को पलटने के लिए सरकार अध्यादेश लाई है, जिसमें उसने कहा था कि दो साल की सजा पाने वाले सांसद या विधायक दोषी करार दिए जाने की तिथि से ही अयोग्य माने जाएंगे।
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मंत्रियों से पहले लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में भाजपा नेताओं ने राष्ट्रपति से मिलकर आग्रह किया था कि वह इस असंवैधानिक अध्यादेश पर हस्ताक्षर न करें।

भाजपा नेताओं ने कहा कि जब संसद से कानून स्थायी समिति के पास विचार के लिए भेजा गया है, ऐसे में अध्यादेश की जरूरत नहीं थी।

वहीं, सूत्रों के मुताबिक मंत्रियों की ओर से राष्ट्रपति को बताया गया है कि कानून की कमी को दूर करने के लिए अध्यादेश लाया गया है।

कांग्रेस में भी विरोध
अध्यादेश को लेकर कांग्रेस में भी विरोध तेज होता दिख रहा है। दिग्विजय सिंह के बाद अब केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा ने भी इस पर सवाल उठा दिए हैं।

ट्विटर पर देवड़ा ने कहा कि दागियों को बचाने के लिए लाए गए इस अध्यादेश से लोकतंत्र पर पहले ही कम हो रहा जनता का भरोसा और उठ जाएगा। कांग्रेस के दूसरे नेता अनिल शास्त्री ने भी देवड़ा के रुख का समर्थन किया है।

क्या है प्रावधान
संविधान के तहत अध्यादेश को मंजूरी देने के लिए राष्ट्रपति को पूरी तरह संतुष्ट होना चाहिए। वह अध्यादेश को फिर विचार के लिए सरकार के पास भेज सकते हैं।
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