राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने एनडीए की नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने के कदमों की सराहना की है।
मुखर्जी ने कोलकाता में शनिवार को इंडियन चैंबर आफ कामर्स (आईसीसी) की वार्षिक महासभा में कहा कि देश में गरीबी दूर करने के लिए निरंतर 8 से 9 प्रतिशत वार्षिक आर्थिक वृद्धि की जरूरत है। राष्ट्रपति ने कहा कि 8-9 फीसदी वार्षिक वृद्धि हासिल करने के लिए निवेश बढ़ाने की आवश्यकता होगी।
‘अब दूसरे बोलते हैं और मैं केवल सुनता हूं’
उन्होंने कहा कि आर्थिक वृद्धि के इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए घरेलू बचत और निवेश के बीच संतुलन बैठाना होगा। निवेश की जरूरत पूरा करने में उन देशों की भूमिका पैदा होती है, जिनके पास निवेश के लिए अतिरिक्त पूंजी है।
मुखर्जी ने कहा, ‘मुझे खुशी है कि सरकार इसके प्रति पूरी तरह जागरूक है और इस संबंध में उचित कदम उठा रही है।’ उन्होंने कहा कि दो साल पहले वह खुद नीति निर्धारण की प्रक्रिया का हिस्सा थे, लेकिन आज अपने संवैधानिक दायित्व के कारण कोई वक्तव्य नहीं दे सकते। उन्होंने कहा, ‘अब दूसरे बोलते हैं और मैं केवल सुनता हूं।’
राष्ट्रपति ने देश में मूलभूत भौतिक और सामाजिक ढांचे को सुधारने की आवश्यकता पर भी बल दिया और कहा कि युवकों में हुनर पैदा करने की जरूरत है, जिससे कि हम अपने युवाओं का पूरा लाभ उठा सकें।