फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चुनावी स्क्रीन पर प्रकाश झा फ्लॉप!

विज्ञापन
विज्ञापन
मृत्युदंड से लेकर गंगाजल तक रुपहले पर्दे पर अलग अंदाज की हिट फिल्में देने वाले मशहूर फिल्मकार प्रकाश झा की राजनीति असल चुनावी स्क्रीन पर वोटरों की भीड़ खींचने में फिर कमजोर साबित होती दिख रही है।
विज्ञापन


पर्दे पर जाति से लेकर भ्रष्ट व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के लिए तालियां बटोरने वाले झा को चुनाव के समय ही पश्चिमी चंपारण की याद आने के ताने सुनाए जा रहे हैं।

बिहार में नमो बयार की गरमी के जवाब में राजद-कांग्रेस के पक्ष में होती दिख रही ‘माई’ (मुस्लिम यादव) गोलबंदी को झा का क्रांतिकारी राजनीतिक नजरिया भी नहीं रोक पा रहा। रही सही कसर राजद उम्मीदवार रघुनाथ झा ब्राह्मण मतदाताओं में अच्छी खासी सेंध लगाकर पूरी कर रहे हैं।
विज्ञापन

भाजपा को नीतीश नहीं, लालू की चुनौती

पश्चिमी चंपारण शायद बिहार में इस चुनाव में पहला ऐसा क्षेत्र है, जहां अच्छी तादाद में ब्राह्मण वोटर लालू प्रसाद यादव की पार्टी के साथ जाने में कोई गुरेज नहीं देख रहे।

ब्राह्मण मतों का यह बंटवारा नमो मंत्र पर सवार भाजपा के मौजूदा सांसद संजय जायसवाल की भी धड़कने बढ़ा रहा है। यहां भाजपा को अगर कोई चुनौती दे रहा है, तो वह लालू हैं, नीतीश नहीं।

वोटरों के मिजाज से यह भी जाहिर हो रहा है कि अगड़ी जातियों को भाजपा और जदयू के सियासी तलाक के बाद लालू से नहीं नीतीश कुमार से परहेज है।

चुनाव के समय की बेतिया क्यों आते हैं झा?

बेतिया शहर के अमरनाथ तिवारी कहते हैं कि प्रकाश झा हालांकि चुनाव के समय ही बेतिया आते हैं, बावजूद इसके उन्हें शुरू में अच्छा रिस्पांस मिल रहा था। मगर चौथे चरण के मतदान के आते-आते बिहार में भाजपा के मुकाबले नीतीश नहीं बल्कि लालू के उभरने की बयार ने झा को कमजोर कर दिया है।

बावजूद इसके फिल्मी हीरो की तरह झा ने अपने अभियान को कमजोर नहीं पड़ने दिया है। चनपटिया के बागेश्वर सहनी कहते हैं कि झा गांवों पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।

लोगों को लीक से हटकर राजनीति और व्यवस्था को जाति पंथ के दायरे से बाहर लाने की बातें कर रहे हैं। मगर लोग प्रकाश झा को मुख्य मुकाबले में नहीं मान रहे क्योंकि उनकी अपनी ही जाति ब्राह्मणों का भी उन्हें खास साथ नहीं मिल रहा है। नीतीश कुमार से उनकी निकटता और बेतिया के लिए कई कल्याणकारी काम भी उनको लाभ नहीं पहुंचा रहे।
विज्ञापन

भाजपा की परेशानी बढ़ा रहे आप के उम्मीदवार

राजद के चेहरे रघुनाथ झा को लेकर ब्राह्मण वोटर नरम हैं। 22 फीसदी मुसलमान और 5 प्रतिशत यादव मतों की गोलबंदी के साथ रघुनाथ झा अगर ब्राह्मण मतों (करीब 11 फीसदी) को बांटने में कामयाब रहे, तो भाजपा को मुश्किल होगी।

इसी वजह से यहां अश्विनी चौबे और मंगल पांडे जैसे ब्राह्मण भाजपा नेताओं की सक्रियता बढ़ाई गई है। जबकि बगल की वाल्मिकी नगर सीट से भाजपा के ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे जाने की सियासी मार्केटिंग की जा रही है।

भाजपा की परेशानी यहां आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार धर्मेश प्रसाद वर्मा भी बढ़ा रहे हैं। पूर्व सांसद वर्मा अपनी चंपारण विकास पार्टी के जरिए अब तक सियासत करते रहे हैं और कई बार विधायक रह चुके हैं।

कायस्थ समुदाय के वर्मा का अगड़ी के साथ पिछड़ी जातियों में भी निजी प्रभाव है और उन्हें जो भी वोट मिलेगा, उसमें ज्यादा नुकसान भाजपा का आंका जा रहा है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें