बिजली वितरण कंपनी राजधानी पावर लिमिटेड और यमुना पावर लिमिटेड ने दिल्ली सरकार के ऊर्जा विभाग और दिल्ली नगर निगम को पत्र लिखा है।
डिस्कॉम्स ने स्पष्ट किया है कि बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया तो 10/11 फरवरी की रात से आम बिजली उपभोक्ताओं के साथ-साथ अस्पताल और मेट्रो में भी बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
पत्र में कहा गया है कि दिल्ली सरकार के पास बीआरपीएल का 166.35 करोड़ रुपये बकाया है। इसके अलावा यमुना पावर लिमिटेड का 95.79 करोड़ रुपये बकाया है। यदि इस बकाया राशि से सरकार स्वयं एनटीपीसी को भुगतान कर दे तो वर्तमान स्थिति से दिल्ली के लोगों को उबारा जा सकता है।
बिजली वितरण कंपनियों पर एनटीपीसी का बकाया
गौरतलब है कि बिजली वितरण कंपनियों पर एनटीपीसी का बकाया है और उसने चेतावनी दी है कि पैसे नहीं चुकाए तो वो बिजली देना बंद कर देगी।
राजधानी पावर लिमिटेड के सीईओ अरविंद गुजराल की ओर से सरकार को लिखे गए पत्र में इस काम को प्राथमिकता पर किए जाने की बात कही गई है।
वहीं, यमुना पावर लिमिटेड के सीईओ की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि दक्षिण दिल्ली नगर निगम के पास बिजली कंपनी का स्ट्रीट लाइट का 118 करोड़ रुपये बकाया है।
पूर्वी एमसीडी पर 80 करोड़ बकाया है। यदि सरकारी एजेंसियों की ओर से भुगतान नहीं किया जाता है तो दिल्ली के करीब 33 लाख उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
दिल्ली में बिजली वितरण कर रही अनिल धीरूभाई अंबानी समूह की कंपनियों ने एनटीपीसी के खिलाफ बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
एनटीपीसी ने इन कंपनियों को नोटिस जारी कर बकाया भुगतान न करने की स्थिति में बिजली आपूर्ति बंद करने की चेतावनी दी है। इस मसले में शुक्रवार को सुनवाई होगी।
एनटीपीसी की चेतावनी के बाद पैदा हुए हालात की जानकारी देने के लिए डीईआरसी के चेयरमैन बृहस्पतिवार को उपराज्यपाल के पास पहुंचे। दोनों के बीच करीब आधे घंटे चर्चा हुई। इस दौरान उपराज्यपाल ने कहा कि किसी भी हालत में दिल्ली में अंधेरा न हो।