भ्रष्ट सरकारी कर्मियों को अब न केवल जेल और जुर्माने की सजा भुगतनी होगी, बल्कि उनकी संपत्ति भी जब्त कर ली जाएगी। संसद की न्याय संबंधी स्थायी समिति ने भ्रष्टाचार निवारण संशोधन बिल में रिश्वत देने को भी कानूनी अपराध की श्रेणी में रखने की सिफारिश की है।
राज्यसभा में बृहस्पतिवार को पेश की गई रिपोर्ट में समिति ने इस बिल के दायरे में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी शामिल करने और ऐसे प्रतिष्ठानों से जुड़े व्यक्ति द्वारा सरकारी अधिकारी को रिश्वत देने के मामले में तीन से सात साल तक की सजा देने की अनुशंसा की है।
समिति ने हालांकि ऐसे मामलों में संबंधित कंपनी पर महज जुर्माना लगाने की ही सिफारिश की है। समिति की सिफारिशें मानी गई तो भविष्य में जांच एजेंसियां सरकारी अधिकारियों से तो दूर सेवानिवृत्त अधिकारियों से भी बगैर सरकार की अनुमति के पूछताछ नहीं कर पाएगी।