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मोदी कांग्रेस को छोड़ें, पहले जोशी को संभालें

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लोकसभा चुनावों के लिए टिकट बंटवारे को लेकर अभी तक सिर्फ कार्यकर्ताओं के विरोध झेल रही भारतीय जनता पार्टी की मुश्किलें अब और बढ़ती नजर आ रही हैं।
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टिकटों की मारामारी इस बार भाजपा के दो ऐसे नेताओं के बीच सामने आई है, जिसे सुलझाने में शायद खुद पार्टी के भी पसीने छूट जाएं।

भाजपा अभी तक यह सोचकर खुश थी कि देश में उसकी लहर चल रही है और आगामी लोकसभा चुनाव में जीत उसकी मुट्ठी में है, लेकिन ताजा विवाद काफी हद तक भाजपा की इस सोच को प्रभावित कर सकता है। आखिर क्या है ये नया विवाद?

वाराणसी सीट किसकी? मोदी या जोशी

नया विवाद भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी के लिए लोकसभा की ‌सीट को लेकर है। भाजपा, आरएसएस और खुद नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि वे यूपी की वाराणसी सीट से चुनाव लड़ें।

यहां से पार्टी के ‌ही वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी सांसद हैं और वे किसी भी कीमत पर वाराणसी सीट छोड़ने को तैयार नहीं हैं। अभी तक यह सुगबुगाहट थी कि पार्टी मुरली मनोहर जोशी को वाराणसी सीट छोड़ने के लिए मना लेगी।

लेकिन गुरुवार को इसी मामले पर वाराणसी में पोस्टर वार शुरू हो गया। मुरली मनोहर जोशी के समर्थकों ने होली के बधाई संदेश लिखकर शहर भर में पोस्‍टर चिपका दिए। इसके बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया।

जोशी-मोदी समर्थक आमने-सामने!

वाराणसी में लगे मुरली मनोहर जोशी के पोस्टरों में जनपद के लोगों को होली की शुभकामनाएं दी गई हैं। इन पोस्टरों को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

दरअसल जोशी की यही शुभकामनाएं मोदी समर्थकों के गले नहीं उतर रही हैं। खबर है कि पोस्टरों को लेकर मोदी समर्थक और जोशी समर्थक आमने-सामने आ गए हैं।

मोदी समर्थकों कह रहे हैं कि वाराणसी का हर व्यक्ति चाहता है कि यहां से नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ें। जबकि जोशी के समर्थक इस बात से इंकार करते हुए अपने नेता को ही वाराणसी से चुनाव लड़वाने की बात कह रहे हैं।
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आडवाणी ने भी रोकी मोदी का राह!

इससे पहले चर्चा थी कि नरेंद्र मोदी गुजरात की गांधीनगर सीट से चुनाव लड़ सकते हैं, क्योंकि यह सीट भाजपा ‌के लिए सबसे सुरक्षित सीट मानी जाती है।

लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने इसी सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताकर मोदी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

आडवाणी वर्तमान में गांधीनगर सीट से ही सांसद हैं। गांधीनगर क्षेत्र में अहमदाबाद शहर भी आता है, जिसमें बड़ी तादाद में मध्यवर्गीय मतदाता भाजपा के समर्थक हैं।

वर्ष 2009 में आडवाणी भाजपा के पीएम उम्मीदवार थे। उस समय आडवाणी ने यहां 1.21 लाख के विशाल मतों से चुनाव जीता था। उन्होंने कांग्रेस के सुरेश पटेल को हराया था। लेकिन 2009 से लेकर अब तक पूरा परिदृश्य बदल चुका है।
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