बढ़ते आद्यौगिक कचरे और प्रदूषण के चलते गंगा में डॉलफिन की संख्या पिछले तीस सालों में 4,200 तक घट चुकी है। एक संगठन डबल्यूडबल्यूएफ-इंडिया द्वारा कराए गए सर्वे से पता चला है कि गंगा नदी में डॉलफिन की संख्या वर्ष 1982 में 6000 थी, जबकि वर्तमान में यह 1800 रह गई है। सालाना 130 से 160 डॉलफिनों की मौत हो जा रही है। यह जानकारी 'माय गंगा, माय डॉलफिन' अभियान के संदर्भ सामने आई है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए संगठन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश और उसके आसपास की जगहों में 'माय गंगा, माय डॉलफिन' नाम से तीन दिन का जागरुकता अभियान चलाया जाना है। 5 से 7 अक्तूबर तक चलने वाले इस अभियान में गंगा नदी में डॉलफिन की संख्या का सर्वे किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बढ़ता जल प्रदूषण डॉलफिन के लिए खतरा बना हुआ है।
इस संगठन के मुताबिक डॉलफिन नेपाल, भारत, और बांग्लादेश तक फैली गंगा, ब्रह्मपुत्र, मेघना और करणाफूली-सांगु नदियों में पाई जाती हैं। यह विस्तृत क्षेत्र 50 से अधिक बांधों और अन्य सिंचाई परियोजनाएं से घिरा हुआ है, जिसके हानिकारक प्रभाव डॉलफिन पर पड़ रहे हैं। साथ ही उद्योगों से निकला कचरा, और कीटनाशकों का उपयोग भी नदी के पानी को प्रदूषित कर रहे हैं। इस अभियान में हुए सर्वे के बाद डॉलफिन की सही संख्या सात अक्तूबर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा घोषित की जाएगी। अभियान की शुरूआत 5 अक्तूबर से हागी और इसका उद्घाटन उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री श्री राजा अरिदमन सिंह करेंगे।
मालूम हो कि डॉलफिन को वर्ष 2009 में राष्ट्रीय जलीय पशु घोषित किया गया था। गंगा नदी की इस डॉलफिन को प्लेटेनिस्टा गंगेटिका कहा जाता है। इसे सामान्य तौर पर 'सुसु' या 'सून्स 'के नाम से भी जाना जाता है। यह गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों में पाई जाने वाली स्थानीय जीव है।