पोंटी चड्ढा को शस्त्र लाइसेंस देने के मामले को प्रशासनिक अमले ने दबा दिया है। पखवाड़े भर बाद भी मामले की जांच शुरू नहीं हो सकी है। प्रशासनिक अमले को शासन के आदेश का इंतजार है।
लिकर किंग पोंटी चड्ढा और उसके भाई हरदीप सिंह की हत्या के बाद यह बात सामने आई कि पोंटी और उसके भाई हरदीप को रामपुर से ही शस्त्र लाइसेंस जारी किया गया था। मामले का खुलासा हुआ तो प्रशासन ने फाइलें खंगलवाई। सामने आया कि 27 जून 1991 को चड्ढा बंधु समेत उसके परिवार के पांच सदस्यों को सात लाइसेंस एक ही दिन में जारी कर दिए गए थे। मामले की परतें खुलीं तो पता चला कि एक ही दिन में लाइसेंस जारी करने का काम तत्कालीन जिलाधिकारी हरीशचंद्र श्रीवास्तव ने किया था।
उस वक्त गुरदर्शन सिंह रामपुर के एसपी हुआ करते थे। एक ही दिन में सात लाइसेंस जारी होने की खबर के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया था। मामले की जांच पहले एडीएम को सौंपे जाने की बात कही गई, लेकिन एडीएम को मामले की जांच नहीं मिली।
बाद में आनन-फानन में पोंटी प्रकरण की फाइल को डीएम ने तलब कर लिया था, लेकिन पखवाड़ा भर बीत जाने के बाद भी अभी तक इस प्रकरण की जांच तक शुरू नहीं हो पाई है। जांच तो दूर इस फाइल को अभी छुआ तक नहीं गया है। वजह चाहे कुछ भी रही हो, लेकिन अफसर अब इस बात को कह रहे हैं कि शासन का कोई आदेश होगा तो ही जांच की जाएगी।