सुखदेव सिंह नामधारी उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष थे। चड्ढा बंधु हत्याकांड में नाम आने के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया था। वे 17 नवंबर को वे डीएलएफ फार्महाउस नंबर-21 स्थित पोंटी के घर उनसे मिलने पहुंचे थे। आरोप है कि नामधारी के लोगों ने ही फार्महाउस नंबर 42 पर कब्जा करवाने की कोशिश की। नामधारी के खिलाफ उत्तराखंड में गंभीर अपराधों समेत एक दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज हैं।
इन आरोपों में हुई गिरफ्तारी
डीएलएफ फार्महाउस नंबर-42 में जबरन घुसने, कब्जा करवाने और रॉबरी।
ये धाराएं लगीं
फार्महाउस पर कब्जा करने को लेकर दर्ज की गई एफआईआर में आईपीसी की धारा 307, 452, 365, 342, 368, 395, 397, 34 और 120बी लगाई गई है।
मैं छिपा नहीं था। मैंने ही हत्याकांड के संबंध में एफआईआर दर्ज कराई थी। मैं जांच में पुलिस के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हूं।
सुखदेव सिंह नामधारी
हाकिमों और राजनीतिज्ञों के चेहरे हो सकते हैं बेनकाब
उत्तराखंड में पोंटी के बिजनेस कमांडर सुखदेव सिंह नामधारी की गिरफ्तारी के बाद कई सियासी रसूख वाले हाकिमों और राजनीतिज्ञों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। माना जा रहा है कि पुलिस की पूछताछ में पोंटी और उसके साइलेंट बिजनेस पार्टनर्स के राज फाश हो सकते हैं। फिलहाल सभी की निगाह नामधारी के बयान पर टिकी है, जिसे दिल्ली पुलिस ने बाजपुर से गिरफ्तार किया है।
उत्तराखंड में किन अफसर और नेताओं के पैसे का पोंटी चड्ढा केबिजनेस में ऑफ द रिकॉर्ड निवेश है इसका गवाह सुखदेव सिंह नामधारी ही है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि नामधारी से बिजनेस को लेकर पूछताछ हुई तो कई नेताओं और अफसरों की कलई खुल सकती है। उत्तराखंड और हिमाचल में खनन के क्षेत्र में भी राज्य के कई नौकरशाहों की हिस्सेदारी पोंटी चड्ढा के साथ होने की चर्चा समय-समय पर होती रही है। पोंटी की हत्या के बाद बदली परिस्थितियों ने ऐसे अफसरों और राजनीतिज्ञों की परेशानी बढ़ा दी है। दिल्ली पुलिस की इनवेस्टिगेशन के दौरान पूछताछ में नामधारी ने यदि पोंटी के साइलेंट बिजनेस पार्टनर्स का खुलासा किया तो उत्तराखंड सहित कई राज्यों में रसूखदारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
गोली लगने पर पोंटी को ले गये थे अस्पताल
उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष सुखदेव सिंह नामधारी ने बताया कि गोली लगने के बाद वह पोंटी को अस्पताल ले गये थे, जहां उसकी मौत हो गई। बाद में सूचना मिली कि हरदीप सिंह की भी मौत हो गई है। घटना के बाद से वह घर पर ही हैं। वह किसी कारणवश पोंटी के अंतिम अरदास में नहीं जा सके। नामधारी ने कहा शुक्रवार सुबह उन्होंने दिल्ली पुलिस को बुलाया। पोंटी हत्याकांड मामले में पुलिस को उनका पूरा सहयोग मिलेगा।
पोंटी चड्ढा से है 17 साल पुरानी दोस्ती
नामधारी ने कहा कि पोंटी चड्ढा से उनकी 17 साल पुरानी मित्रता है। 1995 में पोंटी चड्ढा से उनकी दोस्ती हुई थी। मित्रता के चलते उनका पोंटी के यहां आना-जाना था। पोंटी की हत्या का उन्हें बेहद दु:ख है। उन्होंने ही पोंटी हत्याकांड में दिल्ली पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराई। नामधारी ने बताया कि पोंटी के बिजनेस में उनकी न तो कोई हिस्सेदारी है और न ही कोई पार्टनरशिप।