एक हादसे में पोंटी चड्ढा के दोनों हाथ बेकार हो गए थे, वो हथियार नहीं चला सकता था, लेकिन हैरत की बात ये है कि यूपी में उसे हथियार के तीन लाइसेंस जारी कर दिए गए। रामपुर में तो एक ही दिन में पॉन्टी और उसके भाई हरदीप को हथियारों के चार लाइसेंस दे दिए गए। खुलासा हुआ तो प्रशासन ने पोंटी चड्ढा के नाम से जारी होने वाले लाइसेंसों पर जांच बैठा दी है। मुरादाबाद और रामपुर डीएम से रिपोर्ट मांगी जा रही है। शस्त्र का लाइसेंस बनाना आसान काम नहीं है। ये हैं लाइसेंस बनाने के नियम...
लाइसेंस लेने के लिए आवेदन पत्र को शस्त्र अनुभाग में जमा किया जाता है।
प्रशासन की ओर से संबंधित तहसील और पुलिस से रिपोर्ट तलब की जाती है। पहले पत्रावली सीओ के पास जाती है और उसके बाद डीसीआरबी। यहां से सभी थानों से आवेदक के आपराधिक रिकार्ड के बारे में जानकारी ली जाती है।
आवेदक का चरित्र वेरीफिकेशन भी पुलिस व खुफिया विभाग से कराया जाता है।
आवेदक को मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से फिटनेस सर्टिफिकेट लेना होता है। स्वस्थ होने पर ही यह लाइसेंस दिया जा सकता है। यदि आवेदक का कोई अंग भंग है या फिर दृष्टि दोष है तो लाइसेंस नहीं दिया जा सकता।
संबंधित तहसील की फाइल पर आवेदक के फार्म पर हल्का लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार और एसडीएम की रिपोर्ट ली जाती है।
एसपी और एसडीएम आवेदक की पत्रावली संपूर्ण होने के बाद आवेदक की फाइल को अलग-अलग कर जिलाधिकारी को भेजते हैं।
संपूर्ण पत्रावली पूरी होने के बाद जिलाधिकारी अपने विवेकानुसार शस्त्र लाइसेंस जारी कर देते हैं।
आवेदक फीस जमा करने के बाद शस्त्र लाइसेंस खरीदकर उसको अपने जारी किए लाइसेंस पर शस्त्र की इंट्री कराता है।
यह है लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया
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शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण हर तीन साल बाद कराया जाता है।
नवीनीकरण के लिए आवेदक को फीस जमा करनी होती है और फिर संबंधित थाना और एसडीएम की रिपोर्ट तलब की जाती है।
रिपोर्ट आने के बाद लाइसेंस का नवीनीकरण कराया जाता है।
पोंटी को कैसे जारी हुए लाइसेंस, बैठी जांच
चड्ढा फैमिली के मेंबरों पर लाइसेंसी असलहों की कमी नहीं है। मुरादाबाद प्रशासन ने ही नौ लोगों के नाम पर तेरह लाइसेंस जारी किए हैं। इनमें रिवाल्वर, रायफल और बंदूक है। कई तो ऐसे हैं जिनके पास तीन तीन हथियार हैं। इस ग्रुप के लोगों को यूपी से ही नहीं बल्कि दिल्ली, पंजाब और हरियाणा तक से शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए। पोंटी चड्ढा की हत्या के बाद इंटेलीजेंस ने इसकी पड़ताल शुरू कर दी है। पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला सबसे बड़ा तथ्य यह है कि शारीरिक रूप से अनफिट पोंटी चड्ढा को लाइसेंस कैसे बनाए गए।
27 जून वर्ष 1991 को रामपुर से दो लाइसेंस जारी किए गए थे। उधर मुरादाबाद प्रशासन ने कोठी नंबर 455 के पते पर चड्ढा फैमिली के रिश्तेदारों को भी लाइसेंस जारी किए हैं। जो लोग रहने वाले दूसरे शहरों के हैं लेकिन उन्होंने शस्त्र लाइसेंस मुरादाबाद के पते पर बनवा लिया है। लेकिन मजे की बात देखिए कि कहीं से कोई आपत्ति नहीं लगी थी। पुलिस और प्रशासन ओके की रिपोर्ट लगाता गया। अपर आयुक्त प्रशासन जसवंत सिंह ने बताया कि पूरे मामले की जांच बैठा दी गई। दोनों जिलों के जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जा रही है।