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खतरे में है 'मोहब्बत की मिसाल', पढ़िए ताजमहल पर नया खुलासा

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ताज ट्रेपीजियम जोन अथॉरिटी क्षेत्र में बढ़ रहे औद्योगिक प्रदूषण से ताजमहल पर विपरीत असर पड़ रहा है। एक संसदीय समिति ने इस पर चिंता जाहिर करते हुए ताज की सुंदरता को बनाए रखने के लिए कई सुझाव दिए हैं। समिति ने पर्यावरण मंत्रालय से प्राधिकरण को सही ढंग से काम करने के लिए जरूरी सुविधाएं, आर्थिक सहयोग तथा मैन पावर देने की मांग की है।
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विज्ञान एवं तकनीक तथा पर्यावरण एवं वन पर संसद की स्थायी समिति ने कहा है कि सरकार को अवैध रूप से खुल रहे उद्योग-कारखानों के मामलों को देखना चाहिए। ये कारखाने प्रदूषण नियमों का पालन नहीं करते हैं और सल्फर, नाइट्रोजन डाइक्साइड तथा पेट्रो कोक उत्सर्जित करते हैं। सरकार को इनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने के साथ निषेधात्मक कदम भी उठाने चाहिए। सभी कारखानों में एयर पॉल्यूशन कंट्रोल सिस्टम लगाया जाए।

समिति के अध्यक्ष पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार ने ताज ट्रेपीजियम जोन में प्रशासनिक ढांचे के अभाव पर चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि इसके कारण प्राधिकरण के निर्णय को लागू करने में कठिनाई आती है।
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ताजमहल इको जोन में पेड़ों की कटाई की जांच के निर्देश

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने ताजमहल इको सेंसिटिव जोन में चार हजार पेड़ों की कटाई और बिक्री मामले की जांच के आदेश दिए हैं। एनजीटी अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार की अगुवाई वाली बेंच ने एडवोकेट एमसी मेहता को जांच अधिकारी नियुक्त कर स्थलीय निरीक्षण करने को कहा है। मेहता को दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देनी होगी। मामले में अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी।

एक अखबार में खबर आई थी कि पूर्व डीएफओ ने बाबरपुर में आठ हजार और ताजमहल की 500 मीटर की परिधि में स्थित चार हजार पेड़ों को कटवाकर बेच दिया। यह इलाका पर्यावरण की दृष्टि से बहुत संवेदनशील है। एनजीटी ने इस मामले को स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा था। अधिकरण ने उत्तर प्रदेश सरकार को जांच में सहयोग करने और जरूरत पड़ने पर जांच अधिकारी को सुरक्षा मुहैया कराने के भी निर्देश दिए हैं।

मेहता के साथ जांच के दौरान इंडियन काउंसिल आफ फारेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन देहरादून का प्रतिनिधि भी मौजूद रहेगा। मेहता के दौरे के लिए 50 हजार रुपये की फीस भी तय कर दी गई है। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के एडवोकेट जनरल विजय बहादुर सिंह ने पेड़ों के कटने की खबर को गलत बताया।

उन्होंने इस खबर को शरारत पूर्ण बताते हुए कहा कि वे राज्य की तरफ से गूगल इमेज और रेवेन्यू रिकार्ड के साथ एक विस्तृत एफिडेविट देंगे। ताज इको जोन में एक भी पेड़ नहीं कटा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने जांच के लिए उच्चाधिकार समिति गठित की है। इस पर अधिकरण ने तीन हफ्ते के भीतर रिपोर्ट देने को कहा।
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