मुंबई आतंकी हमले के गुनहगार अजमल कसाब की फांसी पर राजनीतिक दलों ने संतोष व्यक्त किया है, लेकिन फांसी को लेकर सियासत भी गरमा गई है। इसे ‘देर आए दुरुस्त आए’ बताते हुए भाजपा अब संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी की सजा पर अमल करने की मांग कर रही है, जबकि कांग्रेस ने एनडीए शासन में राजीव गांधी के हत्यारों को फांसी नहीं देने पर भाजपा को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है।
भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा कि कसाब को फांसी देने में यूपीए सरकार को चार साल लग गए, जबकि उसके खिलाफ सभी सबूत उपलब्ध थे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को बताना चाहिए कि वह एक दशक पहले संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी के मामले पर खामोश क्यों है।
गडकरी ने कहा कि अफजल गुरु को फांसी होने पर ही संसद पर हमलों के दौरान शहीद हुए लोगों सच्ची श्रद्धांजलि मिलेगी। भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कसाब को फांसी दिए जाने से पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के आकाओं को भी सबक मिलेगा। देश चाहता है कि सरकार सैकड़ों मासूमों का खून बहाने वालों को कड़ा संदेश देकर इसी तरह की सजा दे।
दूसरी ओर कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी कसाब को फांसी दिए जाने का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि सरकार अब अफजल गुरु के मामले को भी आगे बढ़ाएगी। उन्होंने अफजल को फांसी की सजा में देरी पर सरकार पर हमले कर रही भाजपा को निशाने पर लेते हुए राजीव गांधी के हत्यारों का मामला उठा दिया।
उन्होंने कहा कि भाजपा को बताना चाहिए कि एनडीए ने अपने छह साल के शासन में राजीव गांधी के हत्यारों को फांसी क्यों नहीं दी। केंद्रीय दूर संचार मंत्री कपिल सिब्बल ने भी भाजपा को कटघरे में लेते हुए कहा कि उनकी सरकार ने तो आतंकियों को हवाई जहाज से ले जाकर कंधार में छोड़ा था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने आतंकवाद के साथ कभी भी समझौता नहीं किया।