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मोदी को एसपीजी सुरक्षा देने की मांग, केंद्र का इंकार

Wed, 06 Nov 2013 11:39 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की सुरक्षा पर दिल्ली की सियासत गरमा गई है।
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भाजपा सुरक्षा के मामले में अब मोदी को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से पीछे नहीं देखना चाहती है। इसलिए पार्टी उन्हें एसपीजी सुरक्षा कवर देने की मांग पर मैदान में उतर आई है।

दूसरी ओर केंद्र सरकार ने एसपीजी सुरक्षा कवर देने से दो टूक इंकार करते हुए कहा है कि मोदी को पहले ही एनएसजी सुरक्षा दी गई है और उनकी कहीं यात्रा से पहले वहां अग्रिम सुरक्षा अभ्यास का भी आदेश दे दिया गया है।
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सरकार ने भाजपा को यह भी याद दिलाया है कि संसद में बने कानून के तहत एसपीजी सुरक्षा प्रधानमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके परिवार के सदस्यों को ही दी जा सकती है।

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह ने कहा कि भाजपा इस तथ्य से वाकिफ है और इसके बावजूद मोदी की सुरक्षा के नाम पर राजनीति करने की कोशिश कर रही है।

हालांकि भाजपा भी सरकार की इस दलील को खारिज कर मोदी की सुरक्षा को सियासी मुद्दा बनाने में जुट गई है। यही वजह है कि भाजपा के इतिहास में संभवत: यह पहली बार हुआ है जब पार्टी के संसदीय बोर्ड ने किसी नेता का सुरक्षा कवर मजबूत करने के लिए सरकार से मांग की है।

पार्टी संसदीय बोर्ड ने मोदी की सुरक्षा के इंतजाम कड़े करने के लिए मंगलवार रात बाकायदा एक प्रस्ताव पारित कर दिया। खास बात यह है कि भाजपा एसपीजी सुरक्षा की मांग सीधे करने की बजाय संकेतों में कर रही है।

पार्टी का आरोप है कि पटना में बिहार पुलिस ने मोदी के लिए एडवांस सिक्योरिटी लाइजन (एएसएल) के प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया।

पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने संसदीय बोर्ड की मांग दोहराते हुए कहा कि भाजपा उम्मीद करती है कि सरकार मोदी की सुरक्षा के लिए पैदा खतरों का संज्ञान लेगी और उनकी सुरक्षा के मसले पर कोई राजनीति नहीं करेगी।

उन्होंने कहा कि हुंकार रैली में हुए विस्फोटों में आतंकी संगठनों के साथ ही पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।

फिलहाल इन्हें हासिल है एसपीजी सुरक्षा
1. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
2. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
3. सोनिया गांधी
4. राहुल गांधी
5. प्रियंका गांधी वाड्रा, साथ रहने पर उनके पति राबर्ट वाड्रा

आरपीएन का अनोखा ज्ञान
मोदी की सुरक्षा के सवाल पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह एनडीए पर निशाना साधते साधते तथ्यों को ही गड्ढ मड्ढ कर बैठे। उन्होंने कह दिया कि मैं लोगों को बताना चाहता हूं कि जब एनडीए सत्ता में था, तो उनकी सरकार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को पर्याप्त सुरक्षा भी नहीं दे पाई थी, यहां तक कि उन्हें सब इंस्पेक्टर स्तर की सुरक्षा की भी नहीं दी गई, जिसके चलते 1991 में उनकी हत्या हुई। अब भाजपा नेता सुरक्षा की बात कर रहे हैं।
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आरपीएन का यह ज्ञान चर्चा का विषय बना रहा क्योंकि जिस समय राजीव गांधी की हत्या हुई, तब केंद्र में चंद्रशेखर की कार्यवाहक सरकार थी। भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की सरकार इस घटना के सात साल बाद 1998 में बनी।
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