रालेगण सिद्धि में अन्ना हजारे के अनशन के बीच दिल्ली में भी लोकपाल पर सियासत गरमा गई है।
भाजपा और लेफ्ट ने लोकपाल की गेंद सरकार के पाले में डालते हुए कहा कि वे बिना चर्चा के ही इस बिल को पारित कराने को तैयार हैं।
हालांकि भाजपा ने सरकार से दो टूक कह दिया है कि उसे लोकपाल पर राज्यसभा की सलेक्ट कमेटी की सिफारिशों में संशोधन मंजूर नहीं है।
लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने बृहस्पतिवार को सरकार से पेशकश कर दी कि संसद में हंगामे के बावजूद यूपीए और एनडीए को मिलकर लोकपाल विधेयक को पारित कराना चाहिए।
इन दोनों नेताओं ने कहा कि सरकार चाहे तो शुक्रवार को राज्यसभा में सेलक्ट कमेटी की सिफारिशों को हरी झंडी दिलाने के बाद संशोधित बिल को सोमवार को लोकसभा में पारित करा सकती है।
उन्होंने कहा कि जब शोरशराबे के बीच अनुदान की अनुपूरक मांगें पारित हो सकती हैं, तो ऐसी ही हालात में लोकपाल विधेयक पारित क्यों नहीं हो सकता है।
सुषमा ने कहा कि ऐसा करने पर सोमवार को देश को लोकपाल कानून मिल जाएगा। इससे पहले माकपा के सीतराम येचुरी ने कहा कि लेफ्ट बिना चर्चा के लोकपाल बिल को पारित कराने के लिए तैयार है।
लोकपाल की गेंद सरकार के पाले में डालने के बाद एनडीए व लेफ्ट ने दबाव भी बढ़ा दिया है। लोकपाल को लेकर अन्ना हजारे को पत्र लिखने के बाद जेटली की उनसे बात भी हुई।
भाजपा ने बृहस्पतिवार को सुषमा व जेटली की साझा प्रेस कांफ्रेंस का पूरा विवरण भी अन्ना को भेज दिया। इससे पहले जेटली ने कहा कि लोकपाल विधेयक पर पिछले 43 साल में विभिन्न स्तरों पर चर्चा हो चुकी है और अगर हंगामे के कारण इसे बिना चर्चा कराए भी संसद के मौजूदा सत्र में पारित कराने का प्रयास किया जाए तो मुख्य विपक्षी दल को कोई आपत्ति नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि सरकार यदि अपने सहयोगी दलों को हंगामा करने को शह देकर इसे पारित होने में बाधा डालने देती है अथवा सलेक्ट कमेटी की सिफारिशों में संशोधन करना चाहती है तो इसका मतलब निकाला जाएगा कि वह लोकपाल विधेयक को पारित नहीं कराना चाहती।