नेता मोमबत्तियों को लेकर चिंतित नहीं होते, उन्हें चिंता होती है तो अपने वोट बैंक की। यह कहना है जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का। वे शनिवार को नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र सूचना केंद्र के तत्वावधान में आयोजित ‘यंग चेंजमेकर्स कंक्लेव’ को संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम में उमर ने दिल्ली गैंगरेप के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार करने के लिए लोगों द्वारा इंडिया गेट और जंतर-मंतर पर मोमबत्तियां जलाए जाने की पृष्टिभूमि में काफी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आप इसे पसंद करें अथवा नहीं, लेकिन हकीकत यही है कि नेताओं को मोमबत्तियों की नहीं, बल्कि अपने वोट बैंक की चिंता होती है।
नेशनल कांफ्रेंस नेता उमर ने कहा कि आमतौर पर नेता मानते हैं कि समय के साथ जन आंदोलन खत्म हो जाता है, लेकिन अगर आम जनता अपनी मांग को लेकर गंभीर है तो फिर नेताओं को उनकी बात सुननी पड़ती हैं।
बहरहाल, उमर चाहते हैं कि युवा बदलाव का माध्यम बनें।
उन्होंने कहा कि युवा बाहर निकलें और खुद को सुनने योग्य बनाएं। अगर ऐसा हुआ तो फिर कोई उनकी अनदेखी नहीं कर पाएगा। युवा ऐसा बदलाव करने में सक्षम हैं जैसे वे चाहते हैं। युवाओं को बैठे-बिठाए नेताओं पर यह आरोप नहीं लगाना चाहिए कि वे उनकी अनदेखी कर रहे हैं, क्योंकि इस तरह से नेता आपकी बात नहीं सुनेंगे।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर आप चुप रहते हैं अथवा औरों की देखा-देखी सब कुछ चुपचाप स्वीकार कर लेते हैं तो फिर आपकी बात नहीं सुनी जाएगी और आप बदलाव का हिस्सा नहीं बन सकते। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका मानना है कि मौजूदा समय में जनता उसी को वोट देती है तो बेहतर कार्य करता है।
उमर बोले, एफ1 रेसर बनना चाहता था
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को कहा कि वे फार्मूला वन (एफ1) रेसर बनना चाहते थे। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर वे एक राजनीतिक परिवार से नहीं होते तो संभव था कि उनकी यह इच्छा पूरी हो जाती। अपनी इस गुप्त महत्वाकांक्षा का खुलासा उमर ने यंग चेंजमेकर्स कंक्लेव में किया।
उमर से श्रोताओं में बैठी एक युवती ने पूछा था कि अगर वे उमर अब्दुल्ला न होकर सिर्फ उमर होते तो आज वे क्या होते। इस पर उमर कुछ क्षण चुप रहे फिर मुस्कुराकर कहा फार्मूला वन बनने की अपनी इच्छा को सार्वजनिक किया। गौरतलब है कि उमर सात बार के फार्मूला वन वर्ल्ड चैंपियन जर्मन रेसर माइकल शूमाकर के फैन हैं।