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'लव जेहाद': महज वोट बैंक का मुद्दा या हकीकत?

Mon, 25 Aug 2014 02:08 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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यूपी के विपक्षी दल बीजेपी पर आरोप लगाते रहे हैं कि वो वोट बैंक की खातिर राजनीति का सांप्रदायिकरण कर रही है और कुछ नेताओं ने तो बीजेपी पर राज्य में दंगे तक कराने का आरोप लगाया।
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'लव जेहाद' के मसले पर एक बार फिर यूपी की सियासत में उबाल आया हुआ है। बीजेपी का आरोप है कि 'लव जेहाद' के जरिए हिंदू मतदाताओं को साजिशन प्रभावित किया जा रहा है।

हाल ही में भाजपा की उत्तर-प्रदेश की इकाई ने अपनी वृंदावन की दो दिवसीय कार्यकारिणी बैठक में हिन्दू मतदाताओं को प्रभावित करने वाला 'लव जेहाद' का मुद्दा उठाया।
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'लव जेहाद' महज एक राजनीतिक मुद्दा है या फिर इसमें किसी तरह की हकीकत भी है। इस बात को ठीक से समझने के लिए कुछ संवैधानिक संस्थाओं की टिप्पणी और जांच रिपोर्टों पर गौर करना होगा।

सच के करीब पहुंचने के लिए कर्नाटक की सीआईडी रिपोर्ट, केरल के मुख्यमंत्री का बयान, केरल हाई कोर्ट की टिप्पणी और कई सामाजिक संगठनों के बयान उल्लेखनीय है।

क्या कहती CID की जांच रिपोर्ट?

'लव जेहाद' के जरिए धर्मांतरण का मामला जब 2009 में कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने राज्य की सीआईडी को इस दो माह में जांच रिपोर्ट देने का आदेश दिया।

हाईकोर्ट के आदेश पर सीआईडी ने जो रिपोर्ट तैयार की उसमें कहा गया कि राज्य में दो तीन हजार गैर मुस्लिम लड़कियों ने धर्मांतरण किया है लेकिन उसके पास ऐसा कोई सबूत नहीं है जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि धर्मांतरण किसी के दबाव में हुआ।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 'लव जेहाद' नाम की न तो कोई संस्‍था है और न ही संगठन जो इसे सुनियोजित तरीके से चला रहा हो।

सीआईडी रिपोर्ट से आगे मामला केरल हाईकोर्ट और विधान सभा में भी गुंजा।

केरल में भी बन चुका है सियासी मुद्दा

यह मामला कुछ महीनों पहले केरल की विधानसभा में भी कुछ दलों ने जोर-शोर से उठाया था। कुछ नेताओं की मांग पर राज्य के मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने अपने जवाब में विधानसभा को बताया कि 2006 से 2012 तक राज्य में 2667 हिंदू और इसाई लड़कियों का धर्मांतरण हुआ लेकिन उनके पास ऐसे किसी मामले का सबूत नहीं है जिससे कहा जा सके कि ये धर्मांतरण जबरन हुआ है।

2009 में ही केरल के एक छात्रावास से दो लड़कियों के अपहरण का मामला राज्य के हाईकोर्ट पहुंचा। 9 दिसंबर 2009 को न्यायमूर्ति केटी शंकरण ने पुलिस की जांच रिपोर्ट के आधार पर टिप्पणी की कि लड़कियों को किसी बाहरी शक्ति या चमत्कार का झांसा दे अपहरण किया गया था और उनके धर्मपरिवर्तन की कोशिश की गई। अतः जरूरी है कि सरकारें ऐसे मामलों से उचित कानून बनाएं।

बताया जा रहा है कि 'लव जेहाद' यानी मुस्लिम लड़कों का गैर मुस्लिम लड़कियों से शादी करने के मामले अमेरिका और यूरोप में भी आए हैं लेकिन वहां की जांच रिपोर्टों में इसे गलत नहीं साबित किया जा सका।
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'लव जेहाद' पर क्यों ठंडी पड़ी भाजपा?

इस मसले को तूल दे चुकी भाजपा भी अब इस बैकफुट पर नजर आ रही है।

जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने तो इस मसले पर बीजेपी को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है। शरद यादव का कहना है कि बीजेपी के कई बड़े नेता तो सबसे बड़े 'लव जेहादी' है।

उनका कहना है कि भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एमए नकवी और राष्ट्रीय प्रवक्ता शहनवाज हुसैन की पत्‍न‌ियां भी दूसरे धर्म संप्रदाय से हैं। उन्होंने कहा कि दो वयस्क लोगों को अपनी मर्जी से शादी करने का अधिकार है और अलग-अलग धर्म जाति के लोगों की शादियों को बढ़ावा मिलना चाहिए।
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