बिहार चुनाव में नीतीश कुमार को कामयाब चुनावी ब्रांड बनाने में प्रशांत किशोर के संगठन इंडियन पालिटिकल एक्शन कमिटी को मिली कामयाबी के बाद पार्टियों में अगले चुनावों में राजनीतिक मैनेजमेंट की कंपनियों की सेवा लेने को लेकर जबरदस्त हलचल मच गई है।
विचाराधाराओं से परे लेफ्ट, राइट और सेंटर की राजनीति करने वाली पार्टियां असम, पंजाब, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल सरीखे राज्यों में होने वाले चुनाव के लिए किशोर से लेकर तमाम देशी-विदेशी राजनीतिक मैनेजमेंट कंपनियों से संपर्क साध रही हैं। निसंदेह इसमें प्रशांत किशोर की इपका की मांग सबसे ज्यादा है।
मगर बिहार चुनाव में रणनीतिक प्रबंधन के महत्व के बाद दूसरी कंपनियों की पूछ भी तेज हो गई है। असम में भाजपा का चेहरा बनने की कतार में सबसे आगे केन्द्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल और पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए कैप्टन अमिरंदर सिंह अपनी-अपनी चुनावी प्रबंधन कंपनी के चयन को अंतिम रुप देने में जुटे हैं।
चुनावी मैनेजमेंट कंपनियों की तलाश कर रही पार्टियां
चुनावी प्रबंधन कंपनियों से जुड़े अंदरुनी सूत्रों के अनुसार समाजवादी पार्टी में भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अलावा प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री शिवपाल यादव ने भी चुनाव मैनेजमेंट से जुड़ी कुछ कंपनियों से बिहार के नतीजों के बाद चर्चा की है। हालांकि प्रशांत किशोर की टीम इपका से सपा नेताओं का कोई संपर्क नहीं हुआ है।
मगर बताया जाता है कि इस क्षेत्र में काम करने वाली एक और नामी गिरामी चुनाव मैनजमेंट कंपनी ऑकलैंड ब्रिग्स से समाजवादी पार्टी ने संपर्क किया है। वैसे अखिलेश के अमेरिका में डेमोक्रेटस को राष्ट्रपति चुनाव लड़ाने के लिए मशहूर विशेषज्ञ गेराल्ड आस्टिन की सलाह लेने की बात तो पहले से ही जाहिर है।
सूत्रों के अनुसार ऑकलैंड ब्रिग्स की पंजाब में कैप्टन अमरिंदर से तो असम में सर्वानंद सोनोवाल से निर्णायक वार्ता चल रही है। अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता भी कुछ बड़ी कंपनियों से संपर्क साध रही हैं।
प्रशांत किशोर की टीम को बिहार में मिली कामयाबी
दरअसल प्रशांत किशोर की टीम को बिहार में मिली कामयाबी के बाद राजनीतिक पार्टियां चुनाव में प्रबंधन की माहिर कंपनियों को कोई और पकड़े उसे पहले अपने पास लाना चाहती हैं। राहुल गांधी भी दो दिन पहले प्रशांत से मिल चुके हैं।
आलम यह है कि कांग्रेस-भाजपा या समाजवादी विचाराधारा वाले दल ही नहीं वामपंथी पार्टियों को भी अब चुनाव में प्रबंधन की अहमियत महसूस हो रही है। तभी तो केरल और पश्चिम बंगाल के चुनाव के लिए वामपंथी नेता भी इन कंपनियों संपर्क साध रहे हैं।
पेशेवर मजबूरी के तहत अपने नाम का खुलासा नहीं करने की शर्त पर एक चुनावी प्रबंधन कंपनी के निदेशक ने कहा कि वाम नेता भी इसको लेकर रुचि दिखा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बिहार के अनुभवों से साफ है कि अब हमारे यहां चुनाव परंपरागत तरीके से मैनेज नहीं हो सकता और स्ट्रैटजिस्ट ने वोट बैंक के मिथक को तोड़ा है।
नीतीश को चुनाव में चमकदार चेहरा बनाने में कामयाब रहे प्रशांत
नीतीश को बिहार चुनाव में चमकदार चेहरा बनाने में कामयाब रहे प्रशांत के संगठन इपका को तमिलनाडु में द्रमुक तो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी से प्रस्ताव मिलने की खबरे हैं।
हालांकि इपका के निदेशक आईआईटियन ऋषि राज ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि प्रशांत से निजी रुप से किसी ने कुछ कहा हो तो अलग बात है।
मगर इपका के पास अभी द्रमुक या तृणमूल का औपचारिक प्रस्ताव नहीं है। अभी हमारी टीम बिहार चुनाव के बाद डेढ महीने आराम करेगी और फिर 1 जनवरी से हम नई शुरूआत करेंगे।
लेकिन ऋषिराज ने यह जरूर कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी और 2015 में नीतीश कुमार के साथ हमने जो किया है उसके बाद कोई यह झुठला नहीं सकता कि रणनीतिक प्रंबंधन की अब चुनाव में अहम भूमिका है।
खासकर जिस तरह बिहार में हमने बिना संसाधन के जो किया वह पार्टियों के लिए भी काबिलेगौर होगा कि कम संसाधन में भी दमदार अभियान संभव है।