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‘प्रगाश’ बैंड की लड़कियों के पक्ष में उतरे सांसद

Mon, 04 Feb 2013 08:09 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
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कश्मीर के रॉक बैंड ‘प्रगाश’ की लड़कियों के पक्ष में राष्ट्रीय महिला आयोग और सांसदों ने आवाज बुलंद की है। जम्मू-कश्मीर के सर्वोच्च मुफ्ती ने लड़कियों के गाना गाने को गैर इस्लामिक करार दिया था और लड़कियों को बैंड बंद करने के लिए लगातार धमकियां भी मिल रही थी। इसके चलते बैंड की तीनों लड़कियों ने इसे छोड़ने का निर्णय लिया है।  
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राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरमैन ममता शर्मा ने कहा कि यह गलत है। हर किसी का अपना नजरिया होता है, वहां परंपराएं हैं। लेकिन मेरा मानना है कि यदि आजादी के इतने सालों बाद भी हम लड़कियों को किसी काम को करने से रोकते हैं तो हमारा दोहरा मानदंड होगा। बीजेडी सांसद जय पांडा भी रॉक बैंड के समर्थन में सामने आए हैं।

जम्मू-कश्मीर में विपक्षी पार्टी डेमोक्रेटिक पीपुल्स पार्टी के प्रवक्ता नईम अख्तर ने कहा कि इस पूरे प्रकरण पर अनावश्यक रूप से विवाद हो रहा है। भाजपा सांसद नजमा हेपतुल्ला ने भी लड़कियों का पक्ष लिया है। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर कुछ भी बोलने से धर्म का भला नहीं होने वाला है।
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भाजपा के एक अन्य सांसद बलबीर पुंज ने इस मामले पर जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के रुख का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण में हमें याद रखना चाहिए कि कश्मीर और देश के कुछ अन्य हिस्सों में तालिबानीकरण की कोशिश हो रही है। कट्टरपंथी समाज को अपनी इच्छानुसार संचालित करना चाहते हैं।

ऑल गर्ल्स बैंड में 10वीं कक्षा की तीन छात्राएं हैं। इनमें नोमा नाजिर गायक और गिटार, फराह डिबा ड्रमर और अनीका खालिद गिटार बजाती हैं। प्रगाश (अंधेरे से प्रकाश) का पहला लाइव शो दिसंबर में श्रीनगर के म्यूजिक फेस्टिवल में हुआ था।

फतवा समानता के अधिकार का उल्लंघन
केंद्र सरकार ने कहा है कि जम्मू कश्मीर में तीन छात्राओं के पहले बैंड ‘प्रगाश’ पर जारी फतवा महज समानता के अधिकार का उल्लंघन ही नहीं बल्कि एक तानाशाही फरमान है जो महिलाओं को मिली आजादी के खिलाफ है। महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ ने बैंड की तीनों लड़कियों के गायन को गैर इस्लामिक बताने पर ऐतराज जताया है।

तीरथ के मुताबिक बैंड के खिलाफ फतवा लैंगिक भेदभाव के साथ मूलभूत अधिकार को छीनने के समान है। संगीत किसी भी तरह से गैर इस्लामिक कैसे हो सकता है। इस बारे में उन्हें फतवा जारी करने के पहले सोच विचार करना चाहिए। उन्होंने लड़कियों के बैंड के खिलाफ जारी फतवे की निंदा करते हुए कहा कि समाज में पुरुषों और महिलाओं को एक समान अधिकार हैं। ऐसे में लड़कियों के बैंड को निशाना बनाना उचित नहीं है।

एक ओर हम कहते हैं कि महिलाओं और पुरुषों को एक समान माना जाना चाहिए, वहीं दूसरी ओर लड़कियों पर प्रतिबंध लगाते हैं कि वे यह नहीं कर सकती हैं। मेरे विचार से यह बहुत ही गलत है।-ममता शर्मा, अध्यक्ष, राष्ट्रीय महिला आयोग

किसी भी व्यक्ति को अन्य किसी को संगीत या अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए अपने आप को अभिव्यक्ति करने से रोकने का हक नहीं है।- जय पांडा, बीजेडी सांसद

यदि आपको संगीत पसंद नहीं है तो आप मत सुनिए लेकिन धर्म के नाम पर लड़कियों को गाने से रोकना गलत कदम है।--नजमा हेपतुल्ला, भाजपा सांसद

लड़कियों के बैंड पर रोक लगाना समाज को पीछे ले जाना है। चाहे हिंदू या मुस्लिम कट्टरपंथी विचारधारा हो, दोनों ही देश को 18वीं सदी की ओर ले जाएंगी। हम ऐसी चीजों का समर्थन नहीं कर सकते।- दिग्विजय सिंह, कांग्रेस महासचिव
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