क्षेत्र के विकास के नाम पर सांसद निधि बढ़ाने के लिए आसमान सिर पर उठा लेने वाले माननीय अपने हिस्से की राशि को खर्च करने के बदले इस पर कुंडली मारे बैठे हैं।
हालत इतनी बुरी है कि देश भर में 4400 करोड़ रुपये की भारी भरकम रकम विकास मद में खर्च होने का इंतजार कर रही है।
इनमें भी उत्तर भारत के आठ राज्यों की हालत सबसे अधिक बदतर है। इन सूबों में सांसद 611 करोड़ रुपये खर्च नहीं कर पाए हैं। इसमें से भी अकेले उत्तर प्रदेश का हिस्सा 405 करोड़ रुपये है।
दिलचस्प तथ्य यह है कि निधि खर्च करने में उदासीनता बरतने वालों में नए सांसदों की तुलना में नामचीन राजनीतिक हस्तियां ज्यादा उदासीनता दिखा रही हैं।
मसलन राहुल गांधी, सलमान खुर्शीद, मनीष तिवारी, श्रीप्रकाश जायसवाल, मेनका गांधी, राजनाथ सिंह, संजय सिंह, राजकुमारी रत्ना सिंह, प्रदीप जैन, लालजी टंडन, कल्याण सिंह, संदीप दीक्षित जैसे जानेमाने चेहरे खर्च करने के मामले में नए चेहरों से मीलों पीछे हैं।
हां, इन आठ राज्यों में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ही अकेले नेता हैं जिन्होंने बतौर सांसद अपनी निधि का शत प्रतिशत रकम इस्तेमाल की है।
उल्लेखनीय है कि 14वीं लोकसभा में सांसदों ने विकास निधि मद में मिलने वाली रकम के कम होने का हवाला देते हुए लगातार हंगामा किया था। बाद में इस रकम को प्रतिवर्ष दो करोड़ से बढ़ा कर पांच करोड़ रुपये कर दिया गया।
हालांकि सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के ताजा आंकड़े बताते हैं कि सांसदों ने रकम बढ़ाने के लिए जितना हो हल्ला मचाया, उससे भी ज्यादा उदासीनता रकम खर्च करने में दिखाई।
जहां तक उत्तर प्रदेश की बात है तो सबसे अधिक उदासीनता बरतने वालों में मेनका गांधी पहले, बांसगांव के सांसद कमलेश पासवान दूसरे और विजय बहादुर सिंह तीसरे स्थान पर हैं। मेनका अब तक जारी 11.67 करोड़ रुपये में से 4.8 करोड़ ही खर्च कर पाई हैं।
सर्वाधिक खर्च करने वालों में चंदौली के रामकिशुन पहले, फतेहपुर सीकरी की सीमा उपाध्याय दूसरे और कैसरगंज के बृजभूषण शरण सिंह तीसरे स्थान पर हैं।
यूपी के सांसदों का ट्रैक रिकॉर्ड खराब
राहुल गांधी, राजनाथ सिंह और डिंपल यादव 50 फीसदी, सलमान खुर्शीद और संजय सिंह लगभग 60 फीसदी, श्रीप्रकाश जायसवाल 45 फीसदी, प्रदीप जैन 52 फीसदी, राजबब्बर 40 फीसदी, राजकुमारी रत्ना सिंह 45 फीसदी, वरुण गांधी 42 फीसदी, लालजी टंडन 58 फीसदी, अनु टंडन 47 फीसदी, कल्याण सिंह 44 फीसदी रकम खर्च नहीं कर पाए हैं।
उत्तर भारत के आठ राज्यों के सांसदों ने अब तक जारी 1758 करोड़ रुपये में से महज 1147 करोड़ ही खर्च किए हैं।
दिल्ली ने नहीं दिखाया दम
सात संसदीय सीटों वाली दिल्ली लगभग 37 फीसदी रकम खर्च नहीं कर पाई है। देश में सबसे कम खर्च का रिकॉर्ड दक्षिण दिल्ली के सांसद रमेश कुमार के नाम है। वह अब तक महज 29 फीसदी राशि खर्च कर पाए हैं।
दूसरा स्थान मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुत्र और पूर्वी दिल्ली के सांसद संदीप दीक्षित का है। दीक्षित महज 40 फीसदी रकम ही खर्च कर पाए हैं। दिल्ली के सांसद अब तक जारी 85.52 करोड़ में से 49 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाए हैं।
उत्तराखंड में सतपाल सबसे पीछे
पांच सांसदों वाला उत्तराखंड सबसे कम खर्च करने के मामले में उत्तर भारत के सभी राज्यों से आगे है। यहां सबसे कम खर्च करने के मामले में गढ़वाल के सांसद सतपाल महाराज पहले और केसी सिंह बाबा दूसरे स्थान पर हैं। सतपाल ने महज 36 फीसदी तो बाबा ने महज 44 फीसदी रकम ही खर्च की है।
सर्वाधिक खर्च करने वालों में केंद्रीय मंत्री हरीश रावत (94 फीसदी) पहले स्थान पर हैं। इस राज्य ने अब तक जारी 58.65 करोड़ में से 38 फीसदी रकम खर्च नहीं की है।
पंजाब में मनीष तिवारी पिछड़े
13 सांसदों वाले पंजाब में केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी खर्च करने के मामले में सबसे कमजोर साबित हुए हैं।
तिवारी अब तक जारी लगभग 12 करोड़ रुपये में से पौने पांच करोड़ रुपये ही खर्च कर पाए हैं। मोहिंदर सिंह केपी 65 फीसदी खर्च कर दूसरे, संतोष चौधरी 66 फीसदी खर्च कर तीसरे स्थान पर हैं।
विदेश राज्य मंत्री परणीत कौर लगभग 86 फीसदी रकम खर्च कर पहले स्थान पर हैं। इस राज्य ने अब तक जारी 189.50 करोड़ में से 133 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
जम्मू-कश्मीर की स्थिति बेहतर
छह सांसदों वाले इस राज्य ने सांसद निधि का बेहतर उपयोग किया है। राज्य में अब तक 79 फीसदी रकम खर्च हुई है। केंद्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला ने 71 फीसदी रकम खर्च की है।
सबसे कम खर्च करने वालों में जम्मू के सांसद मदन लाल शर्मा (68 फीसदी) हैं। राज्य के सांसदों ने अब तक जारी 83 करोड़ में से लगभग 65 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
हिमाचल प्रदेश अव्वल
उत्तर भारत में चार सांसदों वाले इस राज्य का प्रदर्शन सबसे बेहतर है। हिमाचल का मुख्यमंत्री बनने से पहले वीरभद्र सिंह सौ फीसदी रकम खर्च करने वाले देश के पहले सांसद हैं।
राज्य में सबसे कमजोर प्रदर्शन भाजपा के हमीरपुर के युवा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर का है, जिन्होंने महज 62 फीसदी रकम ही खर्च की है। राज्य के सांसदों ने अब तक 16 करोड़ रुपये खर्च नहीं किए हैं, जिनमें अकेले अनुराग की हिस्सेदारी लगभग सात करोड़ है।
हरियाणा का भी बेहतर नहीं हाल
हरियाणा के सांसदों ने भी लगभग 31 फीसदी रकम का उपयोग नहीं किया है। कम खर्च करने वालों में केंद्रीय मंत्री सैलजा 63 फीसदी, पूर्व केंद्रीय मंत्री राव इंदरजीत सिंह 62 फीसदी शामिल हैं। राज्य में सर्वाधिक खर्च रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा (77 फीसदी) ने किया है। सांसदों को अभी भी 50 करोड़ से अधिक रकम खर्च करनी है।
कितनी रकम खर्च नहीं कर पाए सांसदः-
उत्तर प्रदेश में 35 फीसदी
उत्तराखंड में 38 फीसदी
पंजाब में 30 फीसदी
हरियाणा में 31 फीसदी
दिल्ली में 37 फीसदी
जम्मू-कश्मीर में 22 फीसदी
हिमाचल प्रदेश में 21 फीसदी