अगर केंद्र सरकार देश के विभिन्न हिस्सों से उठी रहीं नए राज्यों की सारी मांगों को मान लेती है तो राज्यों की कुल संख्या 50 के पार पहुंच जाएगी। इस समय देश में 20 से अधिक नए राज्यों की मांग हो रही है।
जिन नए राज्यों की मांग की जा रही है उनमें मणिपुर को विभाजित कर कुकीलैंड, तमिलनाडु को बांटकर कोंगूनाडु, उत्तर बंगाल से अलग कर कामतापुर और कर्नाटक को तोड़कर टुलूनाडु बनाने की आवाजें उठाई जा रही हैं।
बहरहाल, सिर्फ उत्तर प्रदेश ही ऐसा राज्य है, जहां की सरकार विधानसभा में राज्य को चार हिस्सों में विभाजित करने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है। इस प्रस्ताव को मायावती की नेतृत्व वाली बसपा सरकार ने मंजूरी दी थी।
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि नए राज्यों की मांग विभिन्न संगठनों की ओर से वर्षों से की जाती रही हैं।
इन मांगों के अनुसार उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांट कर अवध प्रदेश, पूर्वांचल, बुदेलखंड और पश्चिमांचल अथवा हरित प्रदेश बनाने की आवाजें उठती रही हैं।
इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के आगरा और अलीगढ़ डिवीजन तथा राजस्थान के भरतपुर व मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले को मिलाकर ब्रज प्रदेश बनाने की मांग भी होती रही है।
गृह मंत्रालय से भोजपुर के नाम से अलग राज्य बनाने की मांग भी की जा चुकी है। इस नए राज्य में पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों को शामिल करने मांग की गई है।
बिहार और झारखंड के मैथिली भाषी क्षेत्रों को मिलाकर मिथिलांचल बनाने की मांग भी की जाती रही है। इसके साथ ही महाराष्ट्र को बांट कर नया विदर्भ राज्य बनाने की मांग काफी समय से होती रही है।
अलग राज्य के लिए सबसे मुखर मांग पश्चिम बंगाल से होती रही है। यहां दार्जिलिंग और उसके आसपास के इलाके को मिलाकर गोरखालैंड बनाने की मांग लंबे समय से हो रही है।
इसके अलावा असम के बोडो बहुल इलाकों को मिलाकर बोडोलैंड तथा राज्य के कार्बी आंगलोंग स्वायत्त जिला को अलग कर कार्बी आंगलोंग राज्य बनाने की मांग भी काफी समय से लंबित है।
इतना ही नहीं, गुजरात को बांटकर सौराष्ट्र, असम और नगालैंड के कुछ हिस्सों को मिलाकर दीमालैंड, तमिलनाडु और कर्नाटक तथा केरल के कुछ हिस्सों को मिलाकर कोंगूनाडु, कर्नाटक के कूर्ग क्षेत्र को अलग कर कूर्ग राज्य, ओडिशा और झारखंड तथा छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों को मिलाकर कोसल राज्य बनाने की मांग भी होती रही है।