चलती बस में युवती के साथ हुई दरिंदगी की घटना के लिए बिहारी प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराने के महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे के बयान की विभिन्न राजनीतिक दलों ने तीखी आलोचना की है।
कांग्रेस और भाजपा के नेताओं का कहना है कि देश को विभाजित करने वाली राजनीति पर रोक लगनी चाहिए।
कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा कि इस तरह के बयान लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं। लोग देश को भारत और इंडिया, महाराष्ट्र और बिहार में बांट रहे हैं। यह राष्ट्र और हमारे लोकतंत्र के लिए घातक है।
वहीं भाजपा ने देश को बांटने की राजनीति करने वाली पार्टियों को अयोग्य करार दिए जाने की मांग की है। भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने कहा कि जो नेता सम्मेलनों में नफरत फैलाते हैं, उनके कार्यक्रमों पर रोक लगाई जानी चाहिए। निर्वाचन आयोग को ऐसे दलों को अयोग्य करार देना चाहिए।
जद-यू के नेता अली अनवर अंसारी ने भी राज के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दुष्कर्म की समस्या सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं है। उनकी (राज ठाकरे) आदत ही ऐसे बयान देने की है। वह अपने बयानों में बेबुनियाद आरोप लगाते हैं, जबकि यह समस्या सिर्फ एक राज्य की नहीं है।
क्या कहा था राज ने
एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने शनिवार रात गोरेगांव में एक सभा को संबोधित करते हुए दिल्ली गैंगरेप की घटना के लिए बिहारी प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा था कि दिल्ली गैंगरेप के बारे में सभी बात कर रहे हैं लेकिन कोई यह नहीं पूछ रहा है कि वारदात को अंजाम देने वाले कहां से आए थे और किसने यह काम किया।
बिहारियों के खिलाफ बोलने पर मेरे खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए लेकिन कोई इस बारे में बात नहीं कर रहा है कि ये बलात्कारी बिहार से आए थे। उन्होंने कहा कि पूरा सिस्टम ही ध्वस्त हो चुका है।