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सरबजीत, सज्जन और सीबीआई से सांसत में सरकार

Thu, 02 May 2013 05:20 PM IST
अखिलेश श्रीवास्तव/अवनीश पाठक
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सरबजीत सिंह की मौत के बाद यूपीए सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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दिल्ली सिख दंगे के आरोप में सज्जन कुमार के बरी होने से सिखों का गुस्सा झेल रही कांग्रेस सरबजीत की मौत के बाद गहरी मुश्किल में फंसती दिख रही है।

पिछले दो विधानसभा चुनावों में पंजाब में हार का मुंह देख चुकी कांग्रेस आगामी लोकसभा चुनाव में राज्य में अपनी जमीन बचा पाएगी, यह सवाल फिलहाल हर जुबान पर है।

सरबजीत और सज्जन कुमार के बाद सीबीआई का मुद्दा भी केंद्र को सांसत में डाले हुए है। सीबीआई के झूठ के मुद्दे पर विपक्ष ने पहले ही संसद ठप कर रखी है, अब उसके हाथ एक नया मुद्दा लग गया है।  
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वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई के मुताबिक, 'सरबजीत के मौत के बाद घरेलू राजनीति में सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं।' उन्होंने बताया कि सरबजीत के मामले से भारत-पाक के संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।

किदवई के मुताबिक, 'सरबजीत के मुद्दे सरकार के लिए अप्रत्याशित रहा। इस स्थिति के लिए वो बिल्कुल भी तैयार नहीं थी। कूटनीति के तौर पर उसके पास विकल्पों का अभाव था। इससे पाक से रिश्तों पर जरूर असर पड़ेगा।'

वहीं, राजनीतिक विश्लेषक आर गोपालन की राय है कि सरबजीत का मुद्दा पंजाब में ही नहीं देश के दूसरे हिस्सों में भी कांग्रेस पर भारी पड़ेगा।

उनका कहना है कि सरबजीत का मसला पंजाब में तो कांग्रेस को भारी पड़ेगा ही तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ेगा।

उन्होंने बताया, 'तमिलनाडु के लोग इस बात से आहत हैं कि सरकार एक शख्स के लिए तो इतना कुछ कर रही है लेकिन जिन चालीस हजार तमिलों की हत्या की गई उनकी जरा भी चिंता उसे नहीं है। इस मसले ने विदेश नीति के मसले पर भी सरकार की नाकामी को उजागर कर दिया है।'

हालांकि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सरबजीत सिंह के परिजनों से मुलाकात कर उनकी मौत के बाद होने वाला राजनीतिक नुकसान की भरपाई करने की कोशिश जरूर की है।

लेकिन ये कितना कारगर होगा, ये तो वक्त ही बताएगा।  

सज्जन कुमार के फैसले के बाद की मुश्किलें

1984 के दिल्ली कैंट सिख दंगा मामले में सज्जन कुमार के बरी होने से सिखों में जबर्दस्त गुस्सा है।

सिख सज्जन के फैसले के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार
मान रहे। पिछले दो दिनों से कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी समेत दिल्ली के कई हिस्सों में उन्होंने प्रदर्शन किया है।

सज्जन का बरी होना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन सिखों का आरोप है कि जानबूझकर केस को कमजोर किया गया, जिससे वे गुस्से में हैं।

उनका मानना है कि वे इस केस को ऊपरी अदालतों में ले गए तो वहां भी वे जीत नहीं पाएंगे।

वरिष्ठ पत्रकार राशिद किदवई के मुताबिक, सज्जन सिंह का मसला सबूतों के आधार पर कानूनी तौर पर काफी कमजोर है। इस फैसले के खिलाफ सरकार अगर ऊपरी अदालत में जाती भी है तो भी उसके वहां टिकने की संभावना काफी कम है। निश्चत तौर पर इस मसले पर सिखों में काफी नाराजगी है।  

आर गोपालन की मानें तो सज्जन के फैसले के बाद कांग्रेस ने गुजरात दंगों पर मोदी सरकार की आलोचना का अधिकार भी खो दिया है।

उनका कहना है कि सज्जन सिंह के मसले पर भी कांग्रेस पूरी तरह घिर गई है। इस फैसले से कांग्रेस के खिलाफ सिखों में गुस्सा फूट पड़ा है। गुजरात दंगों के मामले में नरेंद्र मोदी को घेरने का नैतिक अधिकार भी कांग्रेस ने खो दिया है।

सीबीआई का झूठ भी बना फांस

कोलब्लॉक आवंटन के मुद्दे पर विपक्ष के निशाने पर रही केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई के झूठ के बाद और उलझ गई है। इस मुद्दे ने कांग्रेस की राजनीतिक प्रबंधन की कमजोरी को भी उजागर किया है।

राशिद किदवई के मुताबिक, सीबीआई के मसले पर सरकार के लोगों ने जिस तरह से बर्ताव किया है उससे कांग्रेस के अंदर भी बेचैनी है। कई वरिष्ठ कांग्रेसी इस तरह के रवैये से क्षुब्ध हैं। इससे कांग्रेस का पॉलिटिकल मिस मैनेजमेंट उजागर हुआ है और विपक्ष ने इस मसले पर उसे घेर लिया है।
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वहीं, इस मुद्दे पर आर गोपालन की राय है कि सीबीआई के मसले ने बिखरे विपक्ष को एकजुट कर दिया है और इससे सरकार की राजनीतिक मुश्किल बढ़ गई है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को इसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
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