सरबजीत मामले में यूपीए सरकार और कांग्रेस का सियासी डैमेज कंट्रोल जारी है।
शुक्रवार को गृह मंत्रालय ने पेट्रोलियम मंत्रालय को सरबजीत के परिवार को पेट्रोल पंप या गैस एजेंसी देने की सिफारिश की।
गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने इस सिलसिले में खुद पेट्रोलियम मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर जल्द से जल्द प्रक्रिया शुरू करने को कहा है।
पत्र में लिखा गया है कि इस मामले को पेट्रोलियम मंत्रालय प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द पूरा करे।
सरबजीत की मौत के बाद विपक्ष के तीखे तेवरों को देखते हुए सरकार और कांग्रेस की ओर से सियासी डैमेज कंट्रोल के लिए हर मुमकिन कदम उठाए जा रहे हैं।
सरबजीत के परिवार के साथ दिखने की कोशिश में केंद्र सरकार की ओर से 25 लाख की मदद देने का ऐलान किया जा चुका है।
दरअसल, पंजाब की अकाली दल सरकार ने सरबजीत को शहीद का दर्जा देकर सम्मान देने से लेकर उनकी दोनों बेटियों को नौकरी देने के बड़े ऐलान कर दिए हैं।
राज्य सरकार की ओर से परिवार को एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई है। ऐसे में केंद्र सरकार ने भी पेट्रोल पंप या गैस एजेंसी में से एक सरबजीत के परिवार को आवंटित करने का फैसला लेकर सियासी डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है।
शनिवार को राहुल गांधी भी सरबजीत के गांव उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। वह शुक्रवार को भी सरबजीत के परिवार से मिले थे। उस समय वह भावुक भी हो गए थे।
हालांकि सरबजीत की मौत से पहले उनकी बहन ने केंद्र सरकार पर बेरुखी का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग की थी, लेकिन कांग्रेस और सरकार की सियासी डैमेज कंट्रोल की कसरत का असर है कि सरबजीत के परिवार का रुख अब सरकार के प्रति नरम हो गया है।
सरबजीत के परिजनों की सरकार को लेकर बनी सकारात्मक राय के बाद इस मुद्दे पर केंद्र को कठघरे में खड़ा कर रहे विपक्ष पर कांग्रेस नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने जवाबी वार शुरू कर दिया है।
कांग्रेस प्रवक्ता संदीप दीक्षित ने कहा है कि एनडीए सरकार के दौरान लाहौर यात्रा से लेकर आगरा वार्ता तक की गई, लेकिन कभी भी सरबजीत को वापस लाने की कोशिश नहीं हुई। यूपीए सरकार ने ही इस मामले में गंभीरता से कोशिश की।
सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने सीधा सवाल पूछा है कि आखिर एनडीए सरकार क्यों सरबजीत को वापस नहीं ला पाई। इस मसले पर भाजपा को ओछी राजनीति करने से बाज आना चाहिए।