हाईकोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग अध्यक्ष पद से बर्खास्त किए गए शहर के कमला नगर निवासी अनिल यादव की हिस्ट्रीशीट पुलिस ने पहले भले ही छुपाकर रखी हो, लेकिन अब कहानी बदलने लगी है।
उच्च न्यायालय का सख्त रवैया देख पुलिस ने अनिल यादव के गुनाहों की फेहरिस्त फिर से तैयार करना शुरू कर दिया है। उनके खिलाफ दर्ज पुराने मुकदमों की फाइलें खंगाली जा रही हैं। पूरी कार्रवाई गुपचुप चल रही है। अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार को अफसरों ने अनिल यादव के खिलाफ दर्ज मुकदमों की जानकारी ली। यह भी मालूम किया कि हिस्ट्रीशीट कब और किसके आदेश से खोली गई थी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि अनिल यादव के खिलाफ 1990 से पहले 17 केस दर्ज थे।
इनमें जान से मारने की धमकी देना, मारपीट करना और बलवा जैसी धाराओं के मुकदमे थे। सबसे ज्यादा केस हरीपर्वत थाना में थे। इसी साल हिस्ट्रीशीट खोली गई थी। लेकिन बाद में रिकार्ड गायब कर दिया गया। अनिल यादव के रसूख के चलते पुलिस ने हाईकोर्ट को भी पूरा ब्योरा नहीं भेजा था।