ऐसा भी कभी-कभी होता है। पुलिस की अजीबोगरीब करतूतों का यह अनूठा मामला ही है कि जब हत्यारोपी खुद अपना मुकदमा (ट्रायल) चलाने की मांग कर रहा है और पुलिस बता रही है कि वह बरी हो चुका है।
इतना ही नहीं पुलिस कोर्ट के आदेश से साक्ष्य नष्ट कर देने का भी दावा कर रही है। फिलहाल, न्यायालय ने इस प्रकरण का संज्ञान लेते हुए कोर्ट में मौजूद रिकार्ड तलाश कर हाजिर करने का आदेश दिया है।
आरोपी थरवई के बदरा गांव निवासी लालता प्रसाद के खिलाफ वर्ष 1980 में हत्या और लूट का मुकदमा दर्ज हुआ था। लालता प्रसाद किले का कर्मचारी हैं।
इस मामले में उसने जमानत कराई थी। इसके बाद से मुकदमे का ट्रायल कभी नहीं चला, न तो उस पर आरोप तय किया गया। उसकी गवाही भी नहीं हुई। लालता के वकील शशिरिस श्रीवास्तव का कहना है कि उसे गवाही के लिए कोई समन नहीं मिला। इधर, नौकरी से अवकाश ग्रहण का समय आया तो मामला फंस गया।
विभाग ने पेंशन निर्धारण से पहले मुकदमे की स्थिति स्पष्ट करने को कहा। लालता ने जब अदालत में अपने मुकदमे की स्थिति जाननी चाही तो उसके केस से संबंधित कोई रिकार्ड नहीं मिला।