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अनूठा मामलाः मुकदमा न तारीख और मुल्जिम बरी

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ऐसा भी कभी-कभी होता है। पुलिस की अजीबोगरीब करतूतों का यह अनूठा मामला ही है कि जब हत्यारोपी खुद अपना मुकदमा (ट्रायल) चलाने की मांग कर रहा है और पुलिस बता रही है कि वह बरी हो चुका है।
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इतना ही नहीं पुलिस कोर्ट के आदेश से साक्ष्य नष्ट कर देने का भी दावा कर रही है। फिलहाल, न्यायालय ने इस प्रकरण का संज्ञान लेते हुए कोर्ट में मौजूद रिकार्ड तलाश कर हाजिर करने का आदेश दिया है।

आरोपी थरवई के बदरा गांव निवासी लालता प्रसाद के खिलाफ वर्ष 1980 में हत्या और लूट का मुकदमा दर्ज हुआ था। लालता प्रसाद किले का कर्मचारी हैं।

इस मामले में उसने जमानत कराई थी। इसके बाद से मुकदमे का ट्रायल कभी नहीं चला, न तो उस पर आरोप तय किया गया। उसकी गवाही भी नहीं हुई। लालता के वकील शशिरिस श्रीवास्तव का कहना है कि उसे गवाही के लिए कोई समन नहीं मिला। इधर, नौकरी से अवकाश ग्रहण का समय आया तो मामला फंस गया।
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विभाग ने पेंशन निर्धारण से पहले मुकदमे की स्थिति स्पष्ट करने को कहा। लालता ने जब अदालत में अपने मुकदमे की स्थिति जाननी चाही तो उसके केस से संबंधित कोई रिकार्ड नहीं मिला।
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बिना अदालत का फैसला मिले पुलिस ने नष्ट कर दिए साक्ष्य

कोर्ट ने थरवई थाने से मुकदमे की रिपोर्ट तलब की तो थाने ने जो जानकारी दी वह चौंकाने वाली थी। पुलिस की रिपोर्ट में बताया गया कि मालखाने के रजिस्टर के अनुसार हत्या का यह मुकदमा तीन दिसंबर 1984 को समाप्त हो चुका है और अभियुक्त लालता प्रसाद इसमें बरी हो गया है।

इतना ही नहीं पुलिस ने बताया कि कोर्ट के आदेश से उसने मुकदमे से संबंधित साक्ष्य भी नष्ट कर दिए हैं। लालता प्रसाद हैरान, परेशान है क्योंकि विभाग में उसे कोर्ट के फैसले की प्रति देनी है।

उधर, अदालत ने कार्यालय लिपिक को मुकदमे का रिकार्ड तलाश कर पेश करने को कहा ताकि ट्रायल की कार्यवाही पूरी की जा सके। घटना 1980 की है। सोनौटी गांव निवासी जगन्नाथ का लालता आदि से विवाद हुआ था।

आरोप है कि जगन्नाथ की लालता, देवकी प्रसाद और हरिलाल आदि ने पिटाई कर दी थी जिससे उसकी मौत हो गई। तीनों को इस मामले में अभियुक्त बनाया गया था। हरिलाल की मृत्यु हो चुकी है।
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