फेसबुक पर टिप्पणी के बाद दो लड़कियों को गिरफ्तार करने वाले पुलिसकर्मियों को एक जांच रिपोर्ट में दोषी ठहराया गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि युवतियों की गिरफ्तारी को किसी भी तरह से उचित नहीं करार दिया जा सकता है। रिपोर्ट में लड़कियों को गिरफ्तार करने वाले पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश भी की गई है।
मालूम हो कि 21 साल की शाहीन दाढा और रेनू श्रीनिवासन ने शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे के निधन के बाद मुंबई में हुए अघोषित बंद का फेसबुक पर अपनी टिप्पणी में विरोध किया था, जिसके बाद पुलिस ने इन दोनों को गिरफ्तार कर लिया था। इसे लेकर काफी बवाल मचा था।
सूत्रों के मुताबिक आईजी (कोंकण रेंज) सुखविंदर सिंह ने मामले की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट डीजीपी ऑफिस को सौंप दी है, जिसमें यह भी कहा गया है कि लड़कियों के खिलाफ लगाई गई धाराएं उचित नहीं थीं। इसलिए पुलिस को लड़कियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को वापस लेने के लिए सरकार से सलाह लेनी चाहिए।
शाहीन और रेनू पर पुलिस ने शत्रुता और घृणा फैलाने तथा जानबूझ कर भावनाएं आहत करने के आरोपों में आईपीसी के 295 (ए) और 505(2) धाराएं लगाई थीं।
इस बीच, एक चैनल पर चलाई गई एक वीडियो क्लिप में दिखाया गया है कि पालगढ़ के डीएसपी रामदास शिंदे को शिवसैनिकों से कहते दिखाया गया कि लड़कियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि लड़कियां इससे पहले ही माफी मांग चुकी थीं।
मालूम हो कि शिवसेना कार्यकर्ताओं ने शाहीन के चाचा के क्लीनिक पर हमला बोलकर वहां तोड़फोड़ की थी। इस मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।