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CBI कर रही बिजनेस डील की जांच, PMO परेशान

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प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। आईबीएन-लाइव डॉट कॉम की एक खबर की मानें तो सीबीआई ने कुछ बिजनेस डील की जांच की है और प्रधानमंत्री कार्यालय ने गैरजरूरी मानते हुए उन पर आपत्ति जताई है।
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प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस संबंध में सीबीआई निदेशक को अपनी नाराजगी से अवगत भी करा दिया है। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय ने सीबीआई की जांच को 'कैजुअल इन्क्वायरी' मानते हुए कहा है कि ऐसी 'कैजुअल इन्क्वायरी' से निवेशकों का भरोसा प्रभावित होता है।

सीबीआई ने जीएमआर को दिल्ली अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट की जमीन लीज पर दिए जाने के मामले की जांच भी कर रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय जांच एजेंसी को इस मामले में सचेत भी किया है। जीएमआर को दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की जमीन बहुत ही मामूली रेट पर लीज पर दी गई है।
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सीबीआई कर रही लीज मामले की जांच

जीएमआर को 190 एक‌ड़ जमीन लीज पर दिए जाने के मामले में सीबीआई एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड की संदिग्ध भूमिका की जांच कर रही है।

आईबीएन-लाइव डॉट कॉम के अनुसार इस मामले में जब जीएमआर के प्रवक्ता से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी किसी भी जांच के बारे में पता नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को जीएमआर को लीज पर दिए जाने के मामले पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ही अपनी मोहर लगा चुके हैं।

जबकि 2012-13 की कैग की रिपोर्ट में जीएमआर और दिल्‍ली अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट लिमिटेड की डील कई अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया था।

कैग ने उठाया था पहली बार लीज पर सवाल

कैग की रिपोर्ट का कहना है कि दिल्ली इंटरनेशन एयरपोर्ट लिमिटेड ने 29 अप्रैल, 2006 को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को 150 करोड़ रुपए की 'अपफ्रंट फी' दी थी। लेकिन उसने इस संबंध में जरूरी दस्तावेज कैग को उपलब्ध नहीं कराए।

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 6 मार्च, 2009 की एक बैठक में अतिरिक्त 190.19 एकड़ जमीन दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड को देने का निर्णय लिया। ऑपरेशन मैनेजमेंट एंड डेवलपमेंट एग्रीमेंट (OMDA) के तहत जमीन को व‌िमानों से जुड़े कामकाज के लिए दिया गया।

कैग के अनुसार जमीन की कीमत की गणना के लिए अपफ्रंट फी को आधार बनाया गया और अति‌रिक्त 190.19 एकड़ जमीन को महज 6.19 करोड़ रुपयों में लीज पर दे दिया गया।
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पीएमओ को निवेश के माहौल की चिंता

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मार्च, 2012 को ऑडिटर को बताया कि 190.19 एकड़ की ‌अतिरिक्त जमीन विमानों के कामकाज के लिए दी गई, उस पर किसी प्रकार वाणज्यिक निर्माण के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता।

कैग ने सवाल उठाया है कि एक निजी संगठन से उस शुल्क से भी कम शुल्क क्यों लिया जाना चाहिए, जो सरकार ने अपने विभागों के लिए तय कर रखा था।

सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय सीबीआई की जांच से ‌चिंतित है, उसका मानना है कि इससे देश में निवेश का माहौल प्रभाव‌ित हो रहा है।
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