कोयला घोटाले को लेकर सीबीआई और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) आमने-सामने आ गए हैं। कोलगेट में कुमार मंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पीसी पारिख के खिलाफ दर्ज एफआईआर को सही ठहराने के सीबीआई के दावे को पीएमओ ने नकार दिया है।
पीएमओ का सीबीआई के आरोपों पर कहना है कि बिड़ला की कंपनी हिंडाल्को को कोल ब्लॉक का आवंटन सही प्रक्रिया से हुआ है। साथ ही यह भी कहा कि सीबीआई जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है। नियमों के आधार पर आवंटन को जायज ठहराते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पारिख का भी समर्थन किया है।
जबकि सीबीआई का आरोप है कि हिंडाल्को को आवंटन में नियमों का उल्लंघन हुआ है और पारिख ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कंपनी को कोल ब्लॉक आवंटित किया।
साफ है कि कोयला घोटाले में प्रधानमंत्री के दामन पर लगे दाग को धोने के लिए पीएमओ हिंडाल्को को हुए आवंटन को सही और कानून की कसौटी पर खरा बता रहा है।
वहीं दूसरी ओर सीबीआई जांच की दिशा को सही ठहराते हुए कोलगेट में अपने एफआईआर को सही ठहरा रही है। पीएमओ ने खासतौर से कहा है कि इस मामले के संबंध में सीबीआई की जांच कानून के तहत सामान्य दिशा में चलनी चाहिए।
जांच एजेंसी के रुख के बाद पीएमओ की इस सफाई के जरिए एक तरह से प्रधानमंत्री ने पूरे प्रकरण पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के समय प्रधानमंत्री को लेकर जनता के विश्वास और भरोसे को बरकरार रखने की कोशिश के तहत शनिवार को यह सफाई सामने आई।
इसमें कहा गया है कि बेशक हिंडाल्को को कोल ब्लॉक के आवंटन का अंतिम फैसला स्क्रीनिंग कमेटी की राय से अलग था लेकिन कोयला मंत्रालय से आवंटन के मामले में संबंधित एक पक्षकार की ओर से पीएमओ के सामने अपना पक्ष रखने के बाद ही यह अंतिम निर्णय लिया गया था।
बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री इस बात से संतुष्ट थे कि इस संबंध में लिया गया अंतिम निर्णय उचित है और उनके सामने पेश किए गए तथ्य भी कसौटी पर खरे हैं।
पीएमओ की ओर से जारी विस्तृत सफाई में बताया गया है कि ओडिशा स्थित तालाबीरा दो और तीन ब्लॉक हिंडाल्को को आवंटित करने के लिए बिड़ला ने मई 2005 में प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर आग्रह किया था।
अगस्त 2005 में कोयला मंत्रालय ने इससे संबंधित फाइल प्रधानमंत्री को भेजी। इसमें तालाबीरा दो का आवंटन नेवेली लिग्नाइट कारपोरेशन को किए जाने के लिए स्क्रीनिंग कमेटी की ओर से लिए गए निर्णय का जिक्र किया गया था।
इस तरह से हिंडाल्को महानदी कोल लिमिटेड से पर्याप्त कोल लिंकेज मिलने के बावजूद कोयला का इस्तेमाल नहीं कर सकता था। बड़े खनन के रुप में नेवेली लिग्नाइट कारपोरेशन और महानदी कोल लिमिटेड मिलकर तालाबीरा दो और तीन ब्लॉक पर काम शुरू कर सकते थे।