केंद्र में सत्ता बदलते ही उसके बदलाव की आहट 16वीं लोकसभा के बजट सत्र में साफ दिखाई पड़ी। जिस 15वीं लोकसभा में हंगामों का दौर थामे नहीं थमा और कामकाज ठप पड़ा रहा इसके ठीक उलट 16वीं लोकसभा का आगाज किसी सुखद अहसास से कम नहीं रहा।
बीते पांच सालों में यह पहला ऐसा सत्र रहा जो कामकाज के मामले में बेहतर साबित हुआ। पिछले पांच सालों में यूपीए सरकार ने सदन की कार्यवाही बाधित करने के लिए भाजपा को दोषी ठहराया। इसका उलट नजारा 16वीं लोकसभा में भी देखने को मिल सकता था।
लेकिन विपक्ष में रहने के बाद सरकार में आई भाजपा ने अपनी रणनीति से संख्या में काफी कम पड़ गई कांग्रेस को दूसरे विपक्षी दलों के साथ एकजुट नहीं होने दिया। विपक्ष के बटवारे का फायदा न सिर्फ सरकार को मिला बल्कि लोकसभा की कार्यवाही भी सुचारु ढंग से चली।
कांग्रेस की राह पड़ी कमजोर
कांग्रेस यह अच्छी तरह जानती थी कि अपने 44 सांसदों के दम पर वह सरकार को सदन में नहीं घेर सकती है। उसकी रणनीति एआईडीएमके, तृणमूल कांग्रेस जैसे दूसरे बड़े दलों के साथ मिलकर सरकार को घेरने की थी।
लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां भी कांग्रेस को पटखनी देते हुए एआईडीएमके सांसद एम थंबीदुरई को डिप्टी स्पीकर पद दे दिया। दूसरी ओर तृणमूल ने किसी भी मुद्दे पर कांग्रेस का साथ नहीं दिया। यहां कांग्रेस की साझेदार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने भी उसे सदन में मुद्दों पर आधारित समर्थन दिया। जिससे कांग्रेस सदन में अलग थलग पड़ गई।
मोदी सरकार ने दिखाया अपना रूख
कई मुद्दों पर चाहते हुए भी वह सरकार को नहीं घेर पाई। राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्त आयोग विधेयक पर कांग्रेस सरकार के खिलाफ थी लेकिन वह अन्य विपक्षी दलों का ही समर्थन नहीं जुटा पाई जिसके चलते उसे भी विधेयक को पास कराने के दौरान झुकना पड़ा। इस सत्र की सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुल 27 दिन कार्यवाही चली और 167 घंटे काम हुआ। जबकि कार्यवाही मात्र 13 घंटे 51 मिनट ही बाधित रही। इसके ठीक उलट 2013 के बजट सत्र में सिर्फ 19 घंटे 36 मिनट काम हुआ और 167 घंटे कामकाज ठप रहा।
संसद में हुआ कामकाज
बिल पेश किए गए: 20
बिल पारित किए गए: 13
निजी बिल पेश किए गए: 354
उठाए गए लोक महत्व के मुद्दे: 607
नियम 193 के तहत चर्चा: 05
ध्यानाकर्षण के जरिए चर्चा: 05
आधे घंटे की चर्चा: 02
मौखिक प्रश्न पूछे गए: 126
लिखित प्रश्न पूछे गए: 5339
दर्शकों ने देखी कार्यवाही: 1471