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अमेरिकी दौरे पर छाप छोड़ गए मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच दिनी अमेरिकी दौरे के दौरान अपनी छाप छोड़कर स्वदेश लौट चुके हैं। यह दौरा भारतीय अमेरिकी समर्थकों के बीच उनके क्रेज के साथ ही अमेरिका के साथ एक नए रिश्ते की पहचान बना। साथ ही अमेरिकी नेताओं और नागरिकों के बीच भी उन्होंने पैठ बनाई।
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प्रधानमंत्री अपनी अमेरिका यात्रा से बहुत कुछ हासिल कर लौटे हैं। इसमें सबसे अहम है सेना-आईएसआई गठजोड़ वाले पाकिस्तान को अलग-थलग करना, पहली बार पाक सरजमीं से संचालित आतंकी गुटों के साथ दाऊद कंपनी अमेरिका द्वारा जिक्र करना। साथ ही समुद्री विवाद पर चिंता प्रकट कर दोनों देशों का चीन को सख्त संकेत देना।

द्विपक्षीय वार्ता के बाद जारी किए गए बयान में अल कायदा, लश्कर ए ताइबा, जैश ए मोहम्मद और हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकी नेटवर्क के खात्मे के लिए मिलकर और ठोस प्रयास करने की बात कही गई है।
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इसके अलावा 2008 के मुंबई हमले के दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने के लिए पाकिस्तान से कहा गया है। हालांकि इससे पहले भी पाकिस्तान से ये बातें कही गई हैं लेकिन इस पर ज्यादा कुछ हुआ नहीं।

चीन को दिया सीधा संकेत

ओबामा और मोदी ने अपनी मुलाकात से चीन को भी सीधा संकेत दिया है। मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दौरे के दौरान भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ से खुश नहीं हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने टिप्पणी की कि यह देशों पर निर्भर करता है कि वे भारत के साथ किस तरह के संबंध बनाना चाहते हैं। उनका इशारा ओबामा प्रशासन द्वारा भारत के साथ संबंधों और मोदी की यात्रा को तवज्जो देने की तरफ था।

दोनों नेताओं ने समुद्री क्षेत्र के विवाद को लेकर बढ़ते तनाव पर भी चिंता जताई और दक्षिण चीन सागर समेत पूरे समुद्री इलाके में स्वतंत्र आवाजाही और कारोबार की आजादी पर प्रतिबद्धता प्रकट की।

ओबामा का मोदी को खुद मार्टिन लूथर किंग जूनियर मेमोरियल तक ले जाना दोनों नेताओं के बीच बेहतर तालमेल का संकेत देता है। इसके अलावा दोनों नेताओं ने एक साझा संपादकीय भी लिखा, जिसमें दोनों देशों के बीच आपसी साझीदारी, संबंधों की सराहना की गई। दोनों देशों की ओर से चलें साथ साथ का नारा भी सामने आया। मोदी ने ओबामा के साथ भारतीय आईटी कंपनियों की अमेरिकी बाजार में पहुंच को आसान बनाने, एच-वन बी वीजा मसले को उठाया। साथ ही उन्होंने परमाणु समझौते को लेकर अमेरिकी कंपनियों की चिंताओं पर गौर करने की बात कही। अमेरिकी दौरे पर हर जगह मोदी की छाप नजर आई। इस दौरे से भारतीय-अमेरिकी कूटनीति की भाषा में जरूर बदलाव आएगा।
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मंगल के अन्वेषण में सहयोग करेंगे भारत-अमेरिका

मंगल ग्रह की कक्षा में अपने-अपने अंतरिक्ष यान सफलतापूर्वक स्थापित करने के बाद भारत और अमेरिका भविष्य में इस ग्रह के बारे में खोज (अन्वेषण) कार्य में सहयोग करेंगे। अमेरिका का कहना है कि इससे दोनों देशों और दुनिया को काफी लाभ होगा। इस संदर्भ में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के प्रशासक चार्ल्स बोल्डेन और इसरो के चेयरमैन के राधाकृष्णन ने मंगलवार को टोरंटो में आयोजित इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉटिकल कांग्रेस के इतर समझौते पर हस्ताक्षर किए।

दोनों देशों ने एक चार्टर पर हस्ताक्षर किए, जिसके अनुसार नासा-इसरो मार्स वर्किंग ग्रुप स्थापित किया जाएगा जो मंगल ग्रह के अन्वेषण के काम में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का काम करेगा।

साथ ही दोनों पक्षों ने एक अंतरराष्ट्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसमें बताया गया है कि कैसे दोनों एजेंसियां एक साथ नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (एनआईएसएआर) मिशन पर काम करेंगे। इस मिशन को 2020 में लांच किया जाना है। भारत का मंगल यान 24 सितंबर को जबकि अमेरिका का मैवेन 22 सितंबर को लाल ग्रह की कक्षा में पहुंचे हैं।
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