इराक के मोसुल शहर के पास से पांच दिनों पूर्व अगवा किए गए 40 भारतीयों की सकुशल और सुरक्षित घर वापसी के अभियान की कमान अब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संभाल ली है।
शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, कैबिनेट सचिव अजीत सेठ, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव सुजाता सिंह आईबी, रॉ के निदेशक और सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की।
इस दौरान उन्होंने अगवा किए गए भारतीयों की सकुशल रिहाई और हिंसाग्रस्त क्षेत्रों के फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी के लिए हर संभव कदम उठाने के निर्देश दिए। इस बीच विदेश मंत्रालय ने अपहृत सभी भारतीयों के सुरक्षित होने और इनमें से एक भारतीय के आतंकियों के चंगुल से बच निकलने की पुष्टि की है।
मंत्रालय ने अस्पताल में फंसी केरल की 40 नर्सों के सुरक्षित होने और हिंसाग्रस्त क्षेत्र में फंसे 16 लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने में कामयाबी हासिल होने की सूचना दी है।
सरकारी खर्च पर लोगों को वापस लाया जाएगा
इस बीच अगवा लोगों की सुरक्षित रिहाई और हिंसाग्रस्त क्षेत्र में फंसे अन्य भारतीयों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाने के लिए बीते बृहस्पतिवार को बगदाद पहुंचे वरिष्ठ राजनयिक सुधाकर रेड्डी सभी उपलब्ध माध्यमों से बातचीत कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिशों में जुटे हैं।
प्रधानमंत्री के निवास पर शुक्रवार को हुई बैठक में इराक में फंसे भारतीयों को निकलाने के सभी संभावित विकल्पों पर गंभीर चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने बताया कि यह बैठक विदेश मंत्री की समीक्षा बैठक के बाद हुई।
बैठक में इराक में फंसे उन सभी भारतीयों को सरकारी खर्च पर वतन वापसी का फैसला किया गया जो आर्थिक रूप से मजबूर हैं। इसके अलावा दस्तावेज संबंधी समस्या को सुलझाने के लिए युद्घस्तर पर प्रयास करने, इराक के आसपास के देशों से लगातार संपर्क साधे रहने के साथ ही भारतीयों की इराक यात्रा पर एक महीने तक रोक लगाने का फैसला किया गया।
सूत्रों ने बताया कि पीएम ने इस संबंध में कई देशों के शासनाध्यक्षों से बातचीत की है। इस संबंध में पूछे जाने पर प्रवक्ता ने बताया कि हम भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर वह कदम उठा रहे हैं जो इस समय की परिस्थितियों में जरूरी है।
आतंकियों के चंगुल से भागा एक भारतीय
मोसुल के पास बंधक बना कर रखे गए 40 भारतीय नागरिकों में से एक बीते बृहस्पतिवार को आतंकियों के चंगुल से भागने में कामयाब हुआ।
विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि फिलहाल वह दूतावास के संपर्क में है। प्रवक्ता ने बताया कि फिलहाल हिंसाग्रस्त क्षेत्र में 120 भारतीय हैं। इनमें से 8 को हिंसाग्रस्त क्षेत्र से बाहर निकाल लिया गया है, अन्य 8 लोगों हिंसाग्रस्त क्षेत्र में ही सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचाया गया है।
अस्पताल में रह रही केरल की 46 नर्सें सुरक्षित हैं, जबकि अगवा किए गए 39 लोगों को आतंकी संगठनों ने किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचाई है।
बाहर निकालने के लिए सुरक्षित रास्ते पर बात
हिंसाग्रस्त क्षेत्र में फंसे भारतीय जल्द सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाए जा सकते हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के लिए सुरक्षित रास्ता तलाशने का अभियान अंतिम चरण में है।
रेड्डी इसके लिए अपने संपर्क का लगातार उपयोग कर रहे हैं। अगर प्रयास सफल रहा तो अस्पताल में फंसी केरल की 46 नर्सों को सुरक्षित रास्ते से शनिवार तक बगदाद ले आया जाएगा। इसके अलावा बाकी बचे 17 लोगों को भी इन नर्सों के साथ ही बगदाद लाए जाने की योजना है।