प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को राज्यसभा में देश की खस्ता आर्थिक नीति और रुपए के अवमूल्यन पर जवाब देते हुए विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी को आड़े हाथ लिया, जिससे सत्तापक्ष और विपक्ष में तीखी नोंकझोंक हुई।
सदन में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री के बयान के बाद स्पष्टीकरण मांगते हुए संप्रग सरकार में टू जी स्पेक्ट्रम और कोयला घोटाले जैसे भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया और कहा भ्रष्टाचार के कारण ही अंतरराष्ट्रीय पूंजी निवेशकों का भारतीय अर्थव्यवस्था से विश्वास डगमगाया है।
प्रधानमंत्री ने जेटली की इस टिप्पणी पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए पहले तो यह कहा कि भाजपा 2004 की हार को पचा नहीं पायी है। इसलिए वह सरकार की हमेशा आलोचना करती रही है।
उन्होंने पूछा, 'आपने क्या कोई ऐसा देश को देखा है जहां विपक्ष संसद की कार्यवाही को चलने नही देता और प्रधानमंत्री चोर-चोर के नारे लगाता हैं।'
इस पर जेटली ने पलटवार करते हुए कहा कि क्या आपने ऐसा देश देखा है जहां विश्वास मत हासिल करने के लिए सांसदों की खरीद फरोख्त की जाती हो।
इस पर सत्ता पक्ष के सदस्य उठकर खडे हो गए और वे विपक्ष पर हमले करने लगे। वित्त मंत्री चिदंबरम और केंद्रीय मंत्री नारायणसामी, मणिशंकर अय्यर आदि उठकर जेटली की इस टिप्पणी को संसद की कार्यवाही से हटाने की मांग करने लगे।
लेकिन उपसभापति पीजे कुरियन ने इस टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाया नहीं। अय्यर बार-बार चिल्लाकर भाजपा को झूठा बताते रहे। चिदंबरम का कहना था कि जब विपक्ष के नेता बोल रहे थे, तब हम शांतिपूर्वक सुन रहे थे, इसलिए जब प्रधानमंत्री बोले तो आप लोग भी चुप रहे।
कुरियन ने दोनों पक्षों को शांत रहने को कहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष के रवैये के कारण संसद में कई महत्वपूर्ण बिल पास नहीं हो सके और सदन की कार्यवाही बाधित होती रही, जिसके कारण निवेशकों में गलत संदेश गया।
डा. सिंह ने विपक्ष को अपील की कि वह देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सरकार के फैसलों पर सहयोग करे और सर्वसम्मति बनाने दे। भाजपा के प्रकाश जावडे़कर और अन्य सांसद बीच-बीच में उठकर प्रधानमंत्री के स्पष्टीकरण के बीच में टोका-टाकी करते रहे।
लेकिन जेटली ने उन्हें चुप करा दिया। प्रधानमंत्री के स्पष्टीकरण के बाद भाजपा के सांसद वाक आउट कर गए।