भारत सरकार ने आईजैक-मोइवा गुट के नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (एनएससीएन- आईएम) के साथ दो दशक से चल रही वार्ता को अंतिम रूप देते हुए ऐतिहासिक शांति समझौते पर मुहर लगा दी है।
सोमवार को यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के मौजूदगी में गुट के महासचिव थुंगेलिंग मोइवा ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर छह दशक पुराने उग्रवाद पर विराम लगा दिया।
सरकार की तरफ से नगा वार्ताकार आरएन रवि ने समझौते पर हस्ताक्षर किया। सरकार और एनएससीएन (आईएम) ने इस समझौते को नगा समस्याओं का राजनीतिक समाधान करार दिया है।
'हम एक नए रिश्ते में दाख़िल हो रहे हैं'
मोदी ने कहा कि समझौते को होने में इसलिए इतनी देर लगी क्योंकि 'हम एक दूसरे को नहीं समझते थे'। उन्होंने ब्रितानी राज पर 'फूट डालो और राज करो की नीति' के तहत नगाओं को अलग थलग रखने का आरोप एनएससीएन (आईएम) के नेता टी मुइवा ने समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद कहा, "हम एक नए रिश्ते में दाख़िल हो रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि नगाओं पर विश्वास किया जा सकता है।" मोदी ने इस ऐतिहासिक समझौत पर हस्ताक्षर के लिए अपने वरिष्ठ और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह का शुक्रिया अदा किया।
I join the nation in saluting you and conveying our good wishes to the Naga people: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) August 3, 2015
I want to especially thank my senior colleague Home Minister Shri @BJPRajnathSingh whose support and advice was invaluable: PM— PMO India (@PMOIndia) August 3, 2015
Peace, security and economic transformation of North east has been one of my highest priorities-PM Modi pic.twitter.com/WcJ0RE6bHX— ANI (@ANI_news) August 3, 2015
Since becoming Prime Minister last year, peace, security & economic transformation of North East has been amongst my highest priorities: PM— PMO India (@PMOIndia) August 3, 2015
आजादी के साथ ही शुरू हुई थी समस्या
नगालैंड की समस्या 1947 में देश की आजादी के साथ ही शुरु हो गई थी। उसी दौरान नगाओं ने स्वतंत्रता की मांग उठाते हुए कहा कि नागा कभी भी इस देश का हिस्सा नहीं रहे।
अपनी मांग पर अड़े नगाओं ने उग्रवाद का रास्ता अपनाया। नगाओं का सबसे बड़े दल एनएससीएन (आईएम) ने 1997 में पहली बार संघर्ष विराम का करार कर केंद्र सरकार के साथ बातचीत शुरू की।
केंद्र के साथ बातचीत को धोखा बताते हुए संगठन का खापलांग गुट वार्ता से अलग हो कर दोबारा उग्रवाद का रास्ता अपना लिया है। म्यांमार के जंगलों में शरण ले रखे इस गुट को खत्म करने के लिए भारत सरकार, म्यांमार सरकार के साथ सैन्य योजना पर काम कर रही है।