कांग्रेस से मिल रहे संकेतों को मानें तो अगले लोकसभा चुनावों में सत्ता मिलने की सूरत में पार्टी अपने ‘दो ध्रुवीय नेतृत्व’ की नीति को जारी रख सकती है।
कांग्रेस महासचिव और मीडिया विभाग के अध्यक्ष जनार्दन द्विवेदी ने मंगलवार को कहा कि पिछले नौ साल में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच जो संबंध है, ऐसे पहले कभी नहीं देखे गए। यह लोकतंत्र के लिए ‘भविष्य’ की आदर्श स्थिति भी है।
उल्लेखनीय है कि बीते बरसों में यूपीए की दो सरकारों की कमान जहां मनमोहन सिंह के पास रही है, वहीं सोनिया गठबंधन के मुख्य दल कांग्रेस का नेतृत्व संभाले हुए हैं।
असल में सत्ता के दोहरे केंद्र के मुद्दे पर कांग्रेस के अंदर शुरू हुई बहस पर पार्टी ने अपनी औपचारिक राय जाहिर कर मतभेदों को थामने की कोशिश भी की है।
कांग्रेस ने सत्ता के दो केंद्र के मॉडल के ठीक से काम नहीं करने की अपने महासचिव दिग्विजय सिंह की राय को नकार दिया है।
माना जा रहा है कि जनार्दन द्विवेदी ने मंगलवार को मीडिया में अपनी राय नहीं रखी बल्कि पार्टी का रुख स्पष्ट किया है। जो सोनिया गांधी और उनके पुत्र राहुल गांधी की सोच पर आधारित है।
राजनीतिक हलकों में द्विवेदी के बयान का यह मतलब भी निकाला जा रहा है कि कांग्रेस चुनावों के बाद मनमोहन सिंह को तीसरी बार देश का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी देने का विकल्प खुला रखे हुए है।
द्विवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री का चयन पार्टी तय करती है। ऐसी परिस्थिति में राहुल सरकार और संगठन में से किसे प्राथमिकता देंगे, तो द्विवेदी ने कहा कि पार्टी का मानना है कि राहुल की प्राथमिकता संगठन को मजबूत करना है।
गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह ने हाल में कहा था कि वह निजी तौर पर महसूस करते हैं कि सत्ता में दो केंद्र होने के मॉडल ने ठीक ढंग से काम नहीं किया। वैसे उन्होंने साफ किया कि सोनिया गांधी ने सरकार के कामकाज में कभी हस्तक्षेप नहीं किया। दिग्विजय के बयान को भाजपा ने उछालते हुए कांग्रेस पर वार किया था।
दिग्विजय ने कहा था
व्यक्तिगत रूप से मुझे लगता है कि शक्ति के दो ध्रुवों का मॉडल बहुत काम नहीं आया है। मैं सोचता हूं कि जो भी प्रधानमंत्री हो उसे पूरे अधिकारों और शक्ति के साथ शासन करना चाहिए, हालांकि सोनिया गांधी ने सरकार के कामकाज में कभी हस्तक्षेप नहीं किया।
कांग्रेस का कहना है
पिछले नौ साल से सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के बीच जो संबंध और तालमेल है, ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया। यह किसी भी लोकतंत्र के लिए भविष्य की आदर्श स्थिति भी है।
- जनार्दन द्विवेदी, पार्टी प्रवक्ता