2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सामने पेश हुए पूर्व कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री को उन्होंने बाजार मूल्य 35 हजार करोड़ रुपये पर स्पेक्ट्रम की नीलामी की सलाह दी थी। जिसकी अनदेखी की गई। घोटाले के मुख्य आरोपी पूर्व संचार मंत्री ए राजा को छूट दिए जाने को लेकर पूर्व कैबिनेट सचिव ने यह सवाल उठाया है।
चंद्रशेखर ने खुलासा किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को बकायादा चिट्ठी लिखकर 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन की एंट्री फीस 35 हजार करोड़ रुपए करने की सिफारिश की थी। अगर यह सलाह मानी गई हाती तो देश के खजाने को इतने हजार करोड़ रुपए का मुनाफा होता। पूर्व कैबिनेट सचिव द्वारा सुझाई गई कीमत आवंटन की कीमत से करीब 21 गुना ज्यादा है।
जेपीसी के समक्ष पूर्व कैबिनेट सचिव बृहस्पतिवार को 2जी मामले की जांच में गवाही के लिए पेश हुए। प्रधानमंत्री ने उन्हें 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई की सिफारिशों के मामले पर विचार करने के लिए कहा था। चंद्रशेखर ने 26 नवंबर 2007 को जवाब भेजा था।
चंद्रशेखर ने सलाह दी थी कि एंट्री फीस 1658 करोड़ रुपए से बढ़कर 35 हजार करोड़ रुपए होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा है कि उस समय इस मामले में दूरसंचार विभाग प्रशासनिक मंत्रालय था और यह उस पर था कि मौजूदा नीति के आधार पर फैसला ले।
मगर इस सलाह के विपरीत तत्कालीन संचार मंत्री राजा ने 2008 में पुरानी पॉलिसी के तहत ही मनमाने तरीके से कंपनियों के साथ साठगांठ कर स्पेक्ट्रम आवंटित कर दिया। हालांकि चंद्रशेखर ने साथ ही यह भी कहा है कि जिस मूल्य पर तत्कालीन पॉलिसी के तहत आवंटन हुआ है। उससे कोई घाटा नहीं हुआ है।
चंद्रशेखर की घाटा न होने की राय के बावजूद एंट्री फीस को लेकर उनके खुलासे से सरकार के खिलाफ सियासी तूफान आ सकता है। उनका खुलासा यूं भी मायने रखता है कि यूपीए सरकार के वे पसंदीदा शीर्षस्थ नौकरशाह थे और उन्हें प्रधानमंत्री ने दो बार कार्यकाल विस्तार दिया था। चंद्रशेखर जून 2007 से लेकर जून 2011 तक कैबिनेट सचिव थे।
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