टूजी स्पैक्ट्रम घोटाले की जांच कर रही जेपीसी में प्रधानमंत्री व वित्तमंत्री को गवाही के लिए बुलाने के मुद्दे पर घमासान जारी है। दोनों को बुलाने की मांग पर अड़ी भाजपा लगातार दूसरी बैठक में बृहस्पतिवार को शामिल नहीं हुई। समिति के चेयरमैन पीसी चाको ने भाजपा की मांग को फिर से ठुकरा दिया है। चाको ने कहा कि जब पीएसी के चेयरमैन डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने टूजी मामले में प्रधानमंत्री को नहीं बुलाया तो अब भाजपा यही मांग क्यों उठा रही है।
जेपीसी की बैठक के बाद चाको ने कहा कि वित्तमंत्री को बुलाने के मुद्दे पर यदि समिति में सर्वसमत्ति बन जाती है तो वे उन्हें गवाही के लिए बुला देंगे। उन्होंने कहा कि नियम प्रधानमंत्री व वित्तमंत्री को बुलाने की अनुमति नहीं देते हैं। यही वजह है कि प्रधानमंत्री के खुद ऑफर करने के बावजूद डॉ.जोशी ने उन्हें नहीं बुलाया था।
उन्होंने कहा कि वित्तमंत्री को बुलाने का मामला लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को भेजा गया था, लेकिन उन्होंने इस मामले में दखल देने से यह कहकर कर इनकार दिया कि अभी समिति में ही इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है।चाको ने कहा कि वे इस मुद्दे पर समिति में चर्चा कराएंगे। वैसे जेपीसी में कांग्रेस सदस्यों के विरोध के चलते इस मसले पर सर्वसम्मति बनने की कोई संभावना नहीं है। समिति की अगली बैठक आठ नवंबर को होगी।
भाजपा ने किया जेपीसी का बहिष्कार
नई दिल्ली। भाजपा के सदस्यों ने बृहस्पतिवार को टूजी घोटाले पर जेपीसी में सुनवाई का बहिष्कार किया। भाजपा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम को जेपीसी में बुलाने की मांग कर रही है। उसका कहना है कि इनकी गवाही के बगैर टूजी मामले में सही रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकती। लेकिन जेपीसी के चेयरमैन पीसी चाको ने भाजपा की मांग को ठुकरा दिया है। भाजपा का कहना है कि चाको ‘तानाशाह’ की तरह पैनल को चला रहे हैं।(एजेंसी)
विवादित नोट के पीछे तत्कालीन वित मंत्री
नई दिल्ली। केएम चंद्रशेखर ने जेपीसी में कहा कि 2008 में स्पेक्ट्रम की नीलामी सुनिश्चित करने में विफलता के लिए चिदंबरम को जिम्मेदार ठहराने वाले मार्च 2011 के ‘विवादित नोट’ के पीछे तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की भूमिका थी। 25 मार्च, 2011 के पीएमओ को वित्त मंत्रालय द्वारा भेजे गए नोट में कहा गया था कि आवंटन के वक्त वित मंत्री रहे चिदंबरम ‘पहले आओ पहले पाओ’ की नीति की बजाय नीलामी की प्रक्रिया अपनाने पर जोर दे सकते थे।
चंद्रशेखर ने कहा कि यह नोट उन्होंने जेपीसी में आने पर ही देखा। उल्लेखनीय है कि इस नोट पर प्रणब मुखर्जी और चिदंबरम के बीच टकराव की खबरें आई थीं। चंद्रशेखर के अनुसार वित्तमंत्रालय ने वह नोट तैयार किया था और तत्कालीन वित्तमंत्री के देखने के बाद उसे पीएमओ को भेजा गया था।
केएम चंद्रशेखर, पूर्व कैबिनेट सचिव
- जन्म : 20 फरवरी, 1948
- शिक्षा : दिल्ली विवि से इतिहास में एमए
- 1970 बैच के केरल कैडेट के आईएएस
- जून, 2007 से जून 2011 तक कैबिनेट सचिव
- इससे पहले भारत सरकार के राजस्व सचिव, संयुक्त सचिव (वाणिज्य मंत्रालय) के अलावा विश्व व्यापार संगठन, जिनेवा में भारत के राजदूत रहे
- फरवरी, 2011 में केंद्र सरकार द्वारा लोकपाल विधेयक को अधिक अधिकार देने के उद्येश्य से गठित समिति के अध्यक्ष थे
- जुलाई, 2011 से केरल राज्य योजना समिति के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं