पूर्व प्रधान न्यायाधीश पी. सदाशिवम को केरल का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक जनहित याचिका दायर की गई।
याचिका में सर्वोच्च न्यायालय, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और जस्टिस पी. सदाशिवम को पक्षकार बनाया गया है। केंद्र सरकार को याचिका में प्रतिपक्ष के तौर पर शामिल नहीं किया गया है।
शीर्षस्थ अदालत में मोहम्मद अली की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों को विभिन्न स्तरों के पदों पर नियुक्त किया जाना संविधान के अनुच्छेद 124(7) के खिलाफ है।
यह अनुच्छेद संविधान के अनुच्छेद 148(4) की तर्ज पर है, जिसमें कैग को भविष्य में केंद्र या राज्य सरकार के किसी भी कार्यालय में नियुक्त किया जाना प्रतिबंधित है। वही रोक अनुच्छेद 124(7) के तहत सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजों पर भी लागू होती है।
इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट के जज रिटायर होने के बाद सरकार के अधीन कार्य कर रहे हैं, जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित करती है। याचिका में कहा गया है कि जस्टिस सदाशिवम को राज्यपाल पद पर नियुक्त किया जाना संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है।
याचिकाकर्ता ने आग्रह किया है कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजों के आगे काम करने पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया जाए। साथ ही जस्टिस सदाशिवम को केरल के राज्यपाल कार्यालय में अपनी सेवाएं याचिका के निपटारे तक नहीं दिए जाने का निर्देश जारी करने की मांग की गई है।