मुंबई के नजदीक थाणे के ओवला गांव में राजेंद्र ओवलेकर ने अपनी दो एकड़ जमीन पर खेल का एक अनोखा मैदान बनाया है। इस मैदान पर बच्चे नहीं बल्कि तितलियां खेलती हैं। चौंक गए ना आप, बात ही कुछ ऐसी है।
पेशे से फिजिकल ट्रेनर राजेंद्र ओवलेकर को तिललियों से बहुत लगाव है। इसी लगाव की वजह से उन्होंने थाणे के घोड़बंदर रोड पर तितलियों के लिए बाकायदा एक बागीचा तैयार किया है।
यहां 130 तरह की प्रजातियां मिलती हैं
यहां साल भर तितलियों की रौनक रहती है। राजेंद्र की माने तो आप यहां 130 तरह की तितलियां देख सकते हैं।
लेकिन उन्हें यह अनूठा शौक लगा कैसे, राजेंद्र बताते हैं, ''जब हम छोटे थे, तब गांव के आसपास कई बार पौधों पर तितलियों को मंडराते हुए देखते थे। यहीं से मेरी रुचि जागी। साल 2005 में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के एक कार्यक्रम में गया था। वहां तितलियों के बारे में बताया जा रहा था। तभी मैंने तय कर लिया कि अपनी दो एकड़ जमीन को बटरफ्लाई पार्क में तब्दील कर दूंगा।''
तितलियों को आकर्षित करना आसान नहीं
लेकिन तितलियों को अपने पार्क तक खींचकर लाना राजेंद्र के लिए कोई आसान काम नहीं था।
राजेंद्र बताते हैं कि इसके लिए उन्होंने अपने पार्क को तरह-तरह के पौधों से सजाया-संवारा।
तितलियों के लिए फलों की व्यवस्था
वह कहते हैं, ''सभी तितलियां फूलों की ओर आकर्षित नहीं होती। इसलिए हमने यहां कई फ्रुट-बॉस्केट भी रखे हैं।''
राजेंद्र का दावा है कि उनके पार्क में दुर्लभ प्रजाति की कई तितलियों को निहारा जा सकता है।