संसद हमले के दोषी अफजल गु़रू का शव वापस हासिल करने के लिए अब सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई गई है। अफजल को 9 फरवरी को फांसी दी गई थी और उसके बाद शव को तिहाड़ जेल में ही दफना दिया गया।
उसका परिवार चाहता है कि अफजल के शव को उनके हवाले कर दिया जाए, ताकि इस्लामिक रीति के अनुसार उसे दफन किया जा सके, मगर सरकार ने शव नहीं लौटाने का मन बना लिया है।
अब सरकार के फैसले को एनजीओ गरीब नवाज जेल पीड़ित वेलफेयर सोसायटी ने चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार को इस बात की कोई चिंता नहीं है कि फांसी के बाद कैदी का उसके धार्मिक रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार का अधिकार है। यह उनके परिवार का मूल अधिकार है।
याचिका में कहा गया है कि सुरक्षा के आधार पर सरकार परिवार से यह अधिकार नहीं छीन सकती है। अफजल गुरू के मामले में सरकार ने ऐसा ही किया है। इससे अफजल के परिवार को मानसिक आघात पहुंचा है। अफजल का शव उसके परिजन को सौंपा जाना चाहिए ताकि वह इस्लामिक रीति के अनुसार उसे दफन कर सके।
याचिका में फांसी के बाद शव को उसके घरवालों के हवाले करने के लिए उचित दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है। याचिका दायर करने वाले वाले वकील सनोबर अली कुरैशी और अंबिका राय ने कहा कि अफजल गुरू को दफनाने का निर्णय सुप्रीम कोर्ट को लेना चाहिए था। इस मामले में न्यायपालिका का हस्तक्षेप जरूरी है।