विवादों में घिरे आसाराम के खिलाफ यौन शौषण के आरोपों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच के लिए याचिका दायर की गई है।
याचिका में कहा गया है कि कथित संत के बेटे नारायण साईं ने यौन शोषण का आरोप लगाने वाली किशोरी को मानसिक रूप से असंतुलित करार दिया है।
याचिका में कहा गया है कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2000 को लागू करने में ढिलाई बरतने के आरोपों के चलते शीर्षस्थ अदालत की देखरेख में इस मसले की जांच जरूरी हो गई है।
सर्वोच्च अदालत में चेन्नई के डीआई नाथन की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में जोधपुर आश्रम परिसर में आसाराम से संबंधित इस घटना की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में कहा गया है कि गृह मंत्रालय को पीड़ितों की उम्र के निर्धारण के लिये तत्काल वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण कराने का निर्देश दिया जाना चाहिए और जांच की गहन निगरानी की जानी चाहिए ताकि सुबूत नष्ट नहीं किए जा सकें।
याचिका में कहा गया है कि किशोर न्याय कानून, 2000 के उद्देश्यों का लगातार उल्लंघन हो रहा है और पुलिस और राज्य प्रशासन भी उनका पालन नहीं कर रही है। आरोपी भी नाबालिग पीड़ितों के निजता और जीने के अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं।
याचिका के अनुसार किशोर के प्रति अपराध के मामले की पुलिस जांच की संवेदनशीलता और ऐसे अपराधों की रिपोर्ट देने वाला मीडिया भी कानून का उल्लंघन कर रहा है।
एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न के आरोपी 72 वर्षीय आसाराम को शुक्रवार को जोधपुर पुलिस के समक्ष हाजिर होना है और यदि उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।
आसाराम ने अपनी व्यस्तता के चलते जांच अधिकारी के समक्ष हाजिर होने के लिए 19 सितंबर तक का वक्त मांगा है।