महंगाई से जूझ रहे आम आदमी की चिंता पर घड़ियाली आंसू बहाने वाली सरकार का असली चेहरा सामने आ गया है। बजट के एक दिन बाद ही पेट्रोल के दामों में 1.40 रुपये की बढ़ोतरी करके उसने महंगाई पर अपनी बेफ्रिकी साबित कर दी है।
शुक्रवार की आधी रात से महंगे पेट्रोल का दर्द अभी थमा भी नहीं था कि शनिवार को थोक डीजल के दामों में भी एक रुपये लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकार के इस फैसले से नाराज भाजपा व वामपंथी दलों ने सोमवार को संसद में सरकार के घेराव का ऐलान कर दिया है।
माना जा रहा है कि पेट्रोल और डीजल की मूल्य वृद्धि पर विपक्षी दलों के साथ सरकार को अपने सहयोगी दलों की नाराजगी का भी सामना करना पड़ सकता है।
जानकारों का कहना है कि थोक डीजल का दाम बढ़ाने का असर सीधे जनता पर बढ़ेगा क्योंकि इससे बसों का किराया बढ़ेगा। जेनरेटर से जो पावर बैकअप मिलता है। उसके लिए लोगों को ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। किसानों को पंपसेट चलाने के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी। इस बढ़ोतरी से भाजपा और वामदल खासे नाराज हैं।
पिछले महीने महंगाई के मुद्दे पर वामदल दो दिवसीय देश व्यापी आर्थिक बंदी भी कर चुके हैं। अब विपक्षी दलों ने संसद में ही सरकार का घेराव करके विरोध जताने की रणनीति बनाई है। भाजपा राष्ट्रीय परिषद की बैठक में भी महंगाई को लेकर सरकार पर हमला बोला गया।
पेट्रोल-डीजल की मूल्य वृद्धि और बढ़ती महंगाई पर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सहित सपा व बसपा भी संसद में सरकार के खिलाफ खड़ी हो सकती हैं।