एक माला बनाकर देने पर दो रुपये। बस इतना सा लालच दिया था गुरुचरन सिंह सेठी ने शुरू में। पहले गरीब झांसे में आए। फिर मिडिल क्लास वाले पहुंचे एक-एक लाख के मोती खरीदने। इसमें 15-15 हजार का फायदा था।
करोड़पतियों ने लाखों कमाने की सोची। कोई डिस्ट्रीब्यूटर बनने पहुंचा, तो कोई फ्रेंचाइजी लेने। किसी ने नहीं सोचा कि इतनी मालाओं का भला वह कर क्या रहा है?
गुरुचरन सिंह ने पहले गरीबों को अपने जाल में फंसाया, क्योंकि इसमें खर्च कम था। पहले महीने उसके पास सिर्फ पांच हजार मालाएं आईं। उसने दस हजार रुपये पेमेंट कर दिए। मोतियों के जिस पैकेट की सिक्योरिटी मनी वह 1500 रुपये लेता था, वह मुश्किल से 50-60 रुपये के थे।
लालच कमाई का था, इसलिए लोग फंसते चले गए। कई लोगों ने उससे लाखों के मोती लेकर गरीबों से एक एक रुपये में मालाएं बनवाई। पैसा उनका, मेहनत मजदूरों की।
रोजाना हजारों की कमाई
कमाई दोनों को एक एक रुपये प्रति माला। लेकिन पैसा लगाने वाला रोजाना हजारों कमा रहा था। दूसरे महीने उसने दो लाख का पेमेंट किया। इसके बाद तो उसके पास भीड़ लग गई।
सैंया, बाह, फतेहाबाद, शमसाबाद, अछनेरा, मथुरा, वृंदावन, पलवल से लोग लाखों रुपये लेकर पहुंचने लगे। उसके कर्मचारियों ने बताया कि कई लोग तो थैलों में नोट भरकर लाते थे।
गुरुचरन भरोसा जीतने के लिए कई लोगों को यह कहकर लौटा देता था कि मोती नहीं है। इस पर लोग मोती बाद में ले जाने की कहकर पैसा दे जाते थे।
पांच जगह खोले ऑफिस
गुरुचरन सिंह सेठी ने ग्राहक लाने के लिए शहर में एजेंट छोड़ रखे थे। एजेंटों के ऑफिस दयालबाग, सेवला, ताजगंज, बाह में थे। मथुरा में भी ऑफिस था। ये भी बंद मिले हैं।
गुरुचरन सिंह सेठी ने बुधवार रात 10:30 बजे फ्लैट नंबर 301 खाली किया। बिल्डिंग चौकीदार से बोला, जरूरी काम से जा रहा हूं, तुम्हारी भाभी को साथ लेकर आऊंगा।
गुरुचरन सिंह सेठी स्कार्पियो गाड़ी में चलता था। उसकी कार का नंबर है एचआर 26 एमसी 0909। पुलिस इसकी तलाश कर रही है।
उसने ऑफिस कर्मचारियों से कहा था कि 10 सितंबर को छह-छह हजार सैलरी के साथ ईनाम में एक एक एक्टिवा भी देगा। वह एक्टिवा ले आया था। इन्हें भी ले गया।
ऑफिस में सैया का आशीष, बोदला का मनीष, नंगला पदी के रंजीत, जितेंद्र, कंचन, पूजा और लोहा मंडी का दीपक कर्मचारी थे। सभी सुबह सैलरी और एक्टिवा लेने पहुंचे।
ऐसे की ठगी
- 03 महीने पहले ऑफिस खोला, 6-6 हजार सैलरी पर छह कर्मचारी रखे।
- कर्मचारी घर-घर जाकर माला बनाने का फंडा समझाकर आए।
- 108 मोतियों की एक माला बनाने पर दो रुपये मिलते थे।
- 800 ग्राम के पैकेट की सिक्योरिटी मनी 1500 रुपये थी।
- एक पैकेट में 23 माला बनती थी, एक व्यक्ति एक दिन में आसानी से 100-150 माला बना लेता था।
- कमाई देखकर लोग 100 से 300 पैकेट तक ले जाने लगे, कई लोग डिस्ट्रीब्यूटर बनने पहुंचे।
- डिस्ट्रीब्यूटर बनाने के एक एक लाख, फ्रेंचाइजी दिलाने के 10-10 लाख लिए।
- कर्मचारियों को ज्यादा ग्राहक लाने पर एक -एक एक्टिवा देने का लालच दिया।
- 11 करोड़ रुपये इकट्ठा होते ही सारा समान समेटकर भाग गया।
हमें ऐसी उम्मीद नहीं थी..
शमसाबाद के राकेश का कहना है कि उसने लोगों को पैसा कमाते देखा तो एक लाख रुपये डिस्ट्रीब्यूटर बनने के लिए दे दिए। मंडी समिति के किशोर खंडेलवाल ने 2.20 लाख के मोती लिए। पत्नी मीनू खंडेलवाल के नाम से डिस्ट्रीब्यूटरशिप के एक लाख दिए।लोहामंडी के सालिम के पूरे परिवार ने 50-50 हजार के मोतियों के पैकेट लिए।
उसका कहना है कि उन्हें ऐसी उम्मीद नहीं थी।ताजगंज की खुर्शीदा बेगम ने बताया कि उसके परिवार और रिश्तेदारी में कम से कम 20 लाख के मोती लिए माला बनाने के लिए। सैंया के राजकुमार ने बताया कि वह मजदूरों को माला बनाने का पेमेंट कर चुका है। उसका दो लाख रुपये फंस गया।