प्रधानमंत्री पद की दौड़ में लालकृष्ण आडवाणी अपनी अधिक उम्र के कारण हार गए। 63 साल के नरेंद्र मोदी, 86 साल के लालकृष्ण आडवाणी की तुलना में आधिक युवा लगे और उन्हें कार्यकर्ताओं ने तवज्जो दी।
लेकिन वही आडवाणी लोकसभा में कामकाज के मामले में अपने से कई साल छोटे नेताओं को भी आईना दिखा दिया हैं।
15वीं लोकसभा में आडवाणी उपस्थिति 96 फीसदी थी, उन्हीं की उम्र के दूसरे नेताओं की औसत उपस्थिति 78 फीसदी थी। जबकि 55 वर्ष से कम उम्र के लोकसभा सदस्यों की उपस्थिति काफी कम थी।