हर दिन गुजरने के साथ 2014 के लोकसभा चुनावों की जंग में उबाल बढ़ता जा रहा है। भाजपा और कांग्रेस, एक-दूसरे पर हमला बोलने के लिए अब कोई मौका नहीं चूक रही और लड़ाई सियासत के मैदान से बाहर निकलकर व्यक्तिगत हो चली है।
सांप्रदायिक दंगों को लेकर भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी पर हमला करने वाली कांग्रेस अब उनके विकास के मॉडल का मजाक बना रही है और भाजपा सोनिया गांधी और राहुल से पिछले दस साल का हिसाब मांग रही है।
लेकिन इस लड़ाई में सबसे दिलचस्प बात उन दो लोगों से जुड़ी है, जो चुनावी महासमर में सबसे अहम बनकर उभरे हैं। दोनों का ताल्लुक सक्रिय राजनीति से नहीं है। लेकिन दोनों भाजपा और कांग्रेस के लिए एक-दूसरे पर हमला करने के बड़े हथियार बन गए हैं।
भाजपा ने वाड्रा को निशाने पर लिया
इस लड़ाई को एक स्तर ऊपर ले जाते हुए भाजपा ने एक सीडी और बुकलेट निकाली, जिसका शीर्षक दामादश्री रखा गया। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के कथित भ्रष्टाचार और जमीनी सौदों पर सवाल उठाए गए हैं।
सोनिया की बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा ने रायबरेली की हालिया चुनावी सभा में अपने पति का बचाव किया था और भाजपा का यह हमला उस बयान के पांच दिन बाद किया गया।
वाड्रा पर हमला नेताओं के गैर राजनीतिक पारिवारिक सदस्यों को सियासी बहस में न खींचने वाले कायदे को तोड़ चुका है, वहीं कांग्रेस मोदी के गुजरात मॉडल की बखिया उधेड़ने के लिए उद्योगपति गौतम अडानी का इस्तेमाल कर रही है।
कांग्रेस ने चला अडानी का दांव
कांग्रेस के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "अडानी के जरिए बिजनेस लॉबी को भी संदेश दिया जा रहा है कि अगर मोदी सत्ता में आते हैं, तो इस तरह के पूंजीवाद को बढ़ावा दिया जाएगा।"
वाड्रा पर भाजपा का हमला पिछले साल शुरू हुआ, जब पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने लोकसभा में पार्टी के हमलों की अगुवाई की। उन्होंने कहा, "यूं तो कई बिजनेस स्कूल हैं, लेकिन बढ़िया संपर्क वाला एक ऐसा खस है, जो ऐसे किसी स्कूल में नहीं गया, लेकिन ऐसा मॉडल तैयार करने में कामयाब रहा, जहां बिना किसी निवेश के करोड़ों रुपए बनाए जा सकते हैं।"
सिन्हा का इशारा रॉबर्ट वाड्रा की तरफ था, जो हरियाणा और राजस्थान में हुए कई जमीनी सौदों को लेकर विवादों में हैं। उनके और डीएलएफ के बीच हुए एक सौदे को लेकर अशोक खेमका ने अड़चन पैदा की थी, जिसके कुछ रोज बाद खेमका का तबादला कर दिया गया।
मोदी के विकास मॉडल पर निगाह
दूसरी तरफ कांग्रेस शुरुआत में मोदी के गुजरात से जुड़े विकास के मॉडल का जवाब देने के लिए सरकारी आंकड़ों का इस्तेमाल कर रही थी, लेकिन इस महीने की शुरुआत से उसने मोदी-अडानी रिश्तों को सामने रखना शुरू किया।
ग्रामीण इलाकों में होने वाली तमाम रैलियों में कांग्रेस उपाध्यक्ष गुजरात मॉडल को टॉफी मॉडल कह रहे हैं। उन्होंने कहा था, "औरंगाबाद के इलाके के बराबर जमीन यानी 45 हजार एकड़ केवल 300 करोड़ रुपए में दे दी गई। यह गुजरात मॉडल नहीं, टॉफी मॉडल है।"
उन्होंने कहा था, "आपको यहां एक रुपए में टॉफी मिलती है। वहां एक रुपए प्रति मीटर पर जमीन मिलती है। भाजपा से आडवाणी को बाहर कर दिया गया है, और अडानी को शामिल कर लिया गया है।"
अंग्रेजी अखबार ने दी भाजपा को मदद
हरियाणा और राजस्थान में राबर्ट वाड्रा के लिए जमीन सौदा करवाने वाले महेश नागर ने अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल में वाड्रा की संपत्ति के बारे में सनसनीखेज खुलासे के बाद मीडिया के सामने मुंह खोला है।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में नागर ने कहा कि जमीन खरीदने वाले हर व्यक्ति ने पैसे कमाए। क्योंकि पहले जो जमीन कौड़ियों के भाव थी वह अब करोड़ों में बिक रही है।
जमीन तो लाखों लोगों ने ले रखी है और सभी पैसे कमा रहे हैं। नागर का कहना है कि 2005 से 2009 में नहरपार जो जमीन 5 लाख रुपये एकड़ थी उसका दाम अब तीन करोड़ रुपये है। रेट बढ़ने की वजह से जमीन लेने वाले हर व्यक्ति को फायदा मिला है।
कौन हैं महेश नागर?
महेश नागर के अनुसार वाड्रा का नाम तो सिर्फ राजनीतिक कारणों से उछाला जा रहा है। क्योंकि वह सोनिया गांधी के रिश्तेदार हैं।
फरीदाबाद निवासी नागर का नाम जमीन सौदों के कारण चर्चा में रहा है। लेकिन उन्होंने कभी खुलकर अपनी बात नहीं कही। नागर का कहना है कि इस समय वह प्रॉपर्टी डीलिंग नहीं कर रहे।
वह तो अब कबूलपुर में एग्रीकल्चर फार्म का काम कर रहे हैं। उन्होंने वाड्रा के लिए जमीन सौदा करवाकर कोई गलत काम नहीं किया।