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जम्मू कश्मीर में आई कयामत से यूपी में मचा त्राहिमाम

Mon, 08 Sep 2014 02:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ, बुलंदशहर, गुलावठी, पीलीभीत, न्यूरिया
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वहां आसमान से लगातार आफत बरस रही है। इससे सड़क और रेलमार्ग ठप पड़ गए हैं। फोन पर भी किसी से संपर्क नहीं हो पा रहा है। वो किस हाल में होंगे, कुछ पता नहीं चल रहा। यह पीड़ा उनकी है, जिनके अपने वैष्णो देवी के दर्शन या जम्मू-कश्मीर घूमने के लिए गए हैं। मेरठ के करीब 150 लोग वहां फंसे हैं। इनकी कोई हाल-खबर न मिलने से परिजन चिंतित हैं। ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि आफत की बारिश जल्द थमे और उनके अपने सकुशल घर लौट आएं।
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जम्मू-कश्मीर में तेज बारिश से नदियां उफान पर हैं। भूस्खलन की वजह से रास्ते बंद हैं। इन हालात में मेरठ से वहां गए परिवार कटरा, जम्मू, श्रीनगर आदि स्थानों पर फंसे हैं। बुढ़ाना गेट स्थित कावेरी ट्रांसपोर्ट से तीन बसें जम्मू और कटरा के लिए निकली थीं। कपसाड़ निवासी विरेंद्र, खरदौनी निवासी इसरार अहमद और पांडव नगर निवासी राजू बस लेकर एक सितंबर को कटरा पहुंचे थे। ट्रांसपोर्ट संचालक मयंक गुप्ता के मुताबिक, इन बसों में जिले के करीब 150 लोग सवार हैं, जो मां वैष्णो देवी के दर्शन के लिए गए हैं। भारी बारिश के कारण चिनाब नदी का जल स्तर बहुत अधिक बढ़ गया है। इससे जम्मू में तीन से पांच फीट तक पानी भर गया है। रेल मार्ग भी बंद है। ऐसे में वैष्णो देवी की यात्रा दो दिन से रोक दी गई है और सभी दर्शनार्थी कटरा में ही रुके हैं। मयंक के मुताबिक, इंचौली के राजपाल यादव, सियाना से महेंद्र उपाध्याय आदि के जत्थे शामिल हैं। शहर सहित मवाना और किले के यात्री भी जत्थों में शामिल हैं।

सात दोस्त लौटे, दंपति फंसे:
कंकरखेड़ा निवासी ट्रैवल एजेंट अरविंद के मुताबिक, उनके सात दोस्त हिमांशु खन्ना, आकाश शर्मा, मयंक, हरशल जोशी, वरुण गर्ग, विपिन कुमार और संचित गुप्ता तीन सितंबर को श्रीनगर पहुंचे थे। लगातार बारिश के कारण उन्हें वहां एक होटल में ठहरना पड़ा। हालांकि, ये सभी फ्लाइट से सकुशल घर पहुंच गए हैं। अरविंद के मुताबिक, दंपति रितु और गौरव गौतम अब भी श्रीनगर में फंसे हैं। जम्मू और श्रीनगर में फोन और मोबाइल नेटवर्क भी पूरी तरह ठप हो गया है। वहीं, भूस्खलन के कारण जम्मू-श्रीनगर हाईवे सहित सभी मार्ग बंद हैं।
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'साहब! सही सलामत ले आओ हमारे अपनों को'

जम्मू-कश्मीर में आई भयानक बाढ़ में बुलंदशहर के कई युवक फंसे हैं। इससे घरवालों की धड़कने तेज हो गई हैं। परेशान परिजन प्रशासनिक अफसरों से मिलकर अपनों को भयानक बाढ़ के कहर से बचाने की गुहार लगा रहे हैं। उधर, प्रशासनिक स्तर पर भी बुलंदशहर के लोगों को जम्मू-कश्मीर से सही सलामत लौटाने के प्रयास तेज हो गए हैं।

जानकारी के मुताबिक बुलंदशहर के कई लोग जम्मू-कश्मीर में फंसे हैं। ज्ञानलोक कालोनी निवासी राजीव कुमार (45) इन्हीं में शामिल हैं। राजीव जिस गेस्टहाउस में वह ठहरे हैं, वहां 60 लोग और फंसे हुए हैं। रविवार सुबह सात बजे के बाद राजीव का फोन भी बंद हो गया। दोपहर में दूसरे के फोन से उनका केवल एक मैसेज मिला, जिसमें पानी के 16 फिट ऊपर होने का उल्लेख किया गया है। परिजनों ने प्रशासनिक अफसरों के यहां गुहार लगाई है। श्रीनगर एसएसपी से भी संपर्क साधा गया है।
बता दें कि राजीव कुमार सिंह दिल्ली स्थित निजी कंपनी में सर्विस करते हैं। कंपनी के कार्य से उन्हें हर माह जम्मू-कश्मीर समेत अन्य क्षेत्रों में जाना पड़ता है। राजीव की बहन और निजी आईटीआई की प्रिंसिपल गीता चौधरी ने बताया कि ऑफिस के काम की वजह से 29 अगस्त को उनके भाई जम्मू-कश्मीर गए थे। छह सितंबर को फोन पर हालात बिगड़ने की बात कही थी। वह श्रीनगर के कय्यूम गेस्ट हाउस में ठहरे हैं।

रविवार को गेस्ट हाउस की डेढ़ मंजिल पानी में डूब चुकी है। सभी को तीसरी मंजिल पर शिफ्ट कर दिया गया है। रविवार सुबह संपर्क होने पर उन्होंने हालात बेहद खतरनाक बताया। सात बजे के बाद कोई संपर्क नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि राजीव पत्नी प्रिया चौधरी, तीनों बेटों के साथ दिल्ली फिलहाल दिल्ली में रह रहे हैं। उनका रो रोकर बुरा हाल है। वहीं, गुलावठी के चार युवककटरा में फंसे हुए हैं। सभी युवक मां वैष्णो देवी के दर्शन के लिए गए हैं। रविवार को नगरपालिका के पूर्व सभासद अजय कुमार गर्ग का परिजनों के पास फोन आया कि वह बाढ़ के कारण कटरा से न आगे जा सकते हैं और न ही वापस लौट सकते हैं। अभी उन्हें मां वैष्णो देवी के दर्शन भी नहीं हुए हैं। अजय गर्ग के साथ मोहल्ला गांधीगंज निवासी हिमांशु एवं शफाखाना निवासी मोहित और पुराना बाजार निवासी कमल गोयल भी हैं।

सभी श्रद्धालुओं के परिजन काफी चिंतित हैं। अजय कुमार के भाई पवन गर्ग ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर फंसे श्रद्धालुओं को निकालने की मांग की है। हालांकि वह खतरे से बाहर हैं। परिजन उनसे लगातार संपर्क में हैं। जैसे ही रास्ता खुलेगा, वह सुरक्षित लौट आएंगे। फिर भी परिजन किसी अनहोनी की आशंका को लेकर परेशान है। जिले का प्रशासनिक अमला मामले को लेकर सतर्क हो गया है। एडीएम स्तर से श्रीनगर के अफसरों से संपर्क करने की कवायद शुरू हो गई। अन्य कोई और व्यक्ति तो श्रीनगर में नहीं फंसा है। इसको लेकर भी अलर्ट कर दिया गया है।
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पीलीभीत के ढाई सौ लोग फंसे

जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़ में कसबा न्यूरिया के मोहल्ला पकड़िया निवासी ढाई सौ लोग फंस गए हैं। ये सभी लोग तीन महीने पहले श्रीनगर स्थित एक ईंट भट्ठे पर काम करने गए थे। रविवार की सुबह मोहल्ले के ही असलम के मोबाइल पर जम्मू में फंसे पड़ोसी तन्नू की कॉल आईं। उसने दो दिन से खाना नहीं मिलने की बात बताते हुए कहा कि यहां लोग अपने-अपनों को बचाने में लगे हुए हैं। हमारी सुध कोई नहीं ले रहा है। उसकी बातों से मजदूरों के घर वाले परेशान हैं। तब से मजदूरों से कोई संपर्क भी नहीं हो सका है।

पकड़िया के आधे से अधिक लोग ईंट पथाई का काम करते हैं। यहां के मिट्ठू बख्श का पुत्र ठेकेदार हनीफ, मोहम्मद अनीस, रईस अहमद, अलाउद्दीन का पुत्र शहाबुद्दी, तन्नू, पीर बख्श का नाती यासीन, वली मेहम्मद का पुत्र निसार, मुख्तार, मकसूद के भाई इकरार समेत करीब ढाई सौ लोग जून में ईंट भट्ठे पर मजदूरी करने के लिए जम्मू-कश्मीर गए थे। इनमें शामिल फैयाजी बेगम के पति रज्जाक समेत करीब 30 लोग ऐसे हैं जो परिवार के साथ गए हैं। ये सभी श्रीनगर के संडीजाल तामपुर झेलम नदी के पास ईंट भट्ठे पर काम करते थे।

रविवार की सुबह जब लोगों ने जम्मू-कश्मीर में बाढ़ की तबाही का मंजर समाचार पत्रों में पढ़ा तो उनके होश उड़ गए। इस बीच मोहल्ले के असलम के मोबाइल फोन पर जम्मू से तन्नू की कॉल आई। बकौल असलम, तन्नू ने कहा कि कश्मीरी लोग अपने-अपने लोगों को बचा रहे हैं। हम लोगों को नहीं देख रहे हैं। दो दिन से खाना नहीं खाया है। इसके आगे वह कुछ बता पाता फोन डिस्कनेक्ट हो गया। तब से उनका उसके अलावा फंसे लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
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