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नार्थईस्ट में भी कांग्रेस का डिब्बा गोल

Fri, 16 May 2014 10:42 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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उत्तर भारत में जहां मोदी की लहर दिखाई दी तो पूर्वोत्तर भारत में भी कांग्रेस के खिलाफ गुस्सा दिखाई दिया। नॉर्थईस्ट में कांग्रेस की सीटें घटीं।
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कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले नार्थईस्ट राज्यों में भी मोदी लहर कांग्रेस और यहां के क्षेत्रीय दलों पर भारी पड़ी।

हालांकि उत्तरपूर्व भारत के 6 राज्य मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और सिक्किम में मोदी लहर का असर तो नहीं लेकिन यहां लोगों में कांग्रेस के खिलाफ गुस्सा जरूर देखने को मिला।

40 हजार मतो से जीते संगमा

2012 में हुए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान कांग्रेस से अलग हुए पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा ने जनवरी 2013 में अपनी पार्टी बनाई और कांग्रेस की नीतियों के खिलाफ बिगुल फूंका।

पीए संगमा मेघालय की तुरा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी डीडब्ल्यू मोमिन को करीब 40 हजार मतों से पराजित कर जीत हासिल की। इससे पहले इस सीट पर उनकी बेटी अगाथा संगमा एनसीपी पार्टी से सांसद थीं।

गौरतलब है कि चुनाव लड़ने पूर्व संगमा ने भारतीय जनता पार्टी के साथ गंठबंधन का ऐलान किया।

त्रिपुरा में सीपीआई का बजा डंका

नॉर्थईस्ट के राज्य त्रिपुरा की दोनों सीटों में 2009 के आम चुनावों की तरह इस बार भी सीपीआई-एम ने बाजी मारी है।

त्रिपुरा पूर्व से सीपीआई-एम के प्रत्याशी जितेंद्र चौधरी कांग्रेस के सचित्र को करीब 4 लाख 80 हजार मतों से पराजित कर जीत हासिल की। वहीं त्रिपुरा पिश्चम से सीपीआई-एम के ही प्रत्याशी संकर प्रसाद दत्ता ने कांग्रेस के अरुनोदय साहा को करीब 5 लाख मतों से हराकर शानदार जीत हासिल की।

त्रिपुरा में में भाजपा की बात करें तो यहां उसको कोई खास प्रभाव नहीं रहा लेकिन वोटिंग परसेंटेज के हिसाब से भाजपा चौथे स्थान पर रही। वहीं इन राज्यों के क्षेत्रीय दलों पर भी लोगों का भरोसा बढ़ता देखा गया।
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क्षेत्रीय पार्टियों की बढ़त

मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और सिक्किम राज्यों में यहां की क्षेत्रीय पार्टियों ने पहले से बेहतर प्रदर्शन किया।

नागालैंड पीपुल्स फ्रंट ने जहां 2009 के चुनावों 1 सीट पर जीत हासिल की वहीं इस बार इस पार्टी को 2 सीटें मिली हैं। जबकि इन राज्यों में सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट को एक सीट सिक्किम से, सीपीआई-एम को त्रिपुरा की दो सीटें मिली।

क्षेत्रीय पार्टियों की बढ़त के साथ कांग्रेस जहां से 2 सीटें जीती हैं वहां पर उसका वोट प्रितशत भी पहले से कम हुआ है।
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